आपदा प्रभावित किसानों तक मदद न पहुंचने की खबरों के बाद सोमवार को सरकार हरकत में दिखी। सरकार ने माना कि बेमौसम बारिश एवं ओलावृष्टि से अब तक 40 जिलों में फसलों को 1100 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान और 35 लोगों की मौत हुई है।
इसके विपरीत अभी तक केवल 175 करोड़ रुपये की राहत राशि का वितरण हो सका है। सोमवार को राहत के लिए 300 करोड़ रुपये और जारी करने के निर्देश दिए गए हैं।
कलेक्टरों से कहा गया है कि वे कैंप लगाकर तीन दिन में राहत राशि बांट दें। जितनी और धनराशि की जरूरत है, उसे वे टीआर-27 (आकस्मिकता निधि) से निकाल लें। सरकार ने सदमे से किसानों की मौत को नकार दिया है।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जहां प्रभावित किसानों की मदद के लिए 300 करोड़ रुपये रिलीज करने के निर्देश दिए वहीं मुख्य सचिव आलोक रंजन ने वीडियो क्रांफ्रेंसिंग करके राहत राशि के वितरण के लिए कलेक्टरों और कमिश्नरों के पेंच कसे।
शाम को उन्होंने मीडिया के सामने सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि पहले केंद्र सरकार को 33 जिलों में 744 करोड़ रुपये के नुकसान और 22 किसानों की मौत की रिपोर्ट भेजी गई थी।
पांच लाख किसान हुए आपदा से प्रभावित
मथुरा समेत कुछ और जिलों में ओलावृष्टि के बाद नुकसान से प्रभावित जिलों की तादाद 40 हो गई है। इन जिलों में फसलों को 1100 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ है और 35 किसानों की मौत हुई है। करीब पांच लाख किसान आपदा से प्रभावित हुए हैं।
शाम तक सभी जिलों से सूचनाएं मिल जाने के बाद रात तक भारत सरकार को नया मेमोरेंडम भेजा जाएगा।
मुख्य सचिव ने कहा कि आपदा प्रभावितों की मदद के लिए सरकार ने आपदा प्रबंधन निधि से 44 करोड़ रुपये दिए थे और मुख्यमंत्री ने 200 करोड़ रुपये आकस्मिकता निधि से दिए थे। इसमें से 175 करोड़ रुपये का वितरण हुआ है।
मुख्यमंत्री ने 300 करोड़ रुपये और जारी करने के निर्देश दिए हैं। नुकसान के सापेक्ष मदद के लिए 600 करोड़ रुपये की और जरूरत होगी। उन्होंने कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि वे टीआर-27 से धन निकालकर किसानों तक मदद पहुंचाए।
उन्होंने राहत राशि का वितरण तीन दिन में कैंप लगाकर करने के लिए कहा गया है। जिन जिलों में राहत राशि आरटीजीएस से किसानों के खाते में ट्रांसफर हुई है, उसकी भी कैंप लगाकर जानकारी दी जाएगी।
डीएम मौके पर जाएंगे, रेडम चेकिंग होगी
क्या आपदा राहत वितरण की ग्राउंड रिएलिटी जांचने के लिए वह वह या उनकी टीम आज ही किसी नजदीकी जिले में रेडिंग चेकिंग के लिए जाएंगी ? इस सवाल पर मुख्य सचिव ने कहा कि उन्होंने आज ही डीएम व कमिश्नर को इस संबंध में निर्देश दिए हैं।
आपदा से हर मौत पर डीएम खुद मौके पर जाएंगे। सदमे से मौत की सूचना की तस्दीक के लिए वे एसडीएम को मौके पर भेजेंगे। मंडल स्तर पर कमिश्नर जिलों में टीम भेजकर रेंडम चेकिंग कराएंगे।
लेखपालों द्वारा घर बैठकर फसलों के नुकसान का सर्वे किए जाने की भी डीएम और कमिश्नर रेंडम चेकिंग कराएंगे। शासन स्तर से टीम भेजकर भी राहत कार्यों का रेंडम तरीके से जायजा लिया जाएगा।
आरटीजीएस से पैसा भेजा, किसानों को जानकारी नहीं
’अमर उजाला’ ने सोमवार के अंक में बाराबंकी के जिन पांच किसानों की मौत के बाद उनके परिजनों तक मदद न पहुंचने की रिपोर्ट प्रकाशित की थी, उन किसानों के खाते में सोमवार को दुपहर बाद आरटीजीएस से 30-30 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए गए।
हालांकि शाम तक किसानों को इसकी जानकारी देने के लिए कोई अधिकारी उनके पास तक नहीं पहुंचा। कोषागार से मदद भेजे जाने की पुष्टि हुई है।
कल आएगी भारत सरकार की टीम
मुख्य सचिव ने बताया कि नुकसान के सर्वेक्षण के लिए भारत सरकार के अफसरों की टीम 8 और 9 अप्रैल को आएगी। फसलों के नुकसान के लिए आपदा राहत की भारत सरकार की दरें कम हैं।
अभी सिंचित क्षेत्र के किसानों को नौ हजार और असिंचित क्षेत्र में साढ़े चार हजार रुपये प्रति हेक्टेयर राहत दी जाती है। भारत सरकार से इसे बढ़ाने का अनुरोध किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने अपने स्तर से राहत दरें दोगुनी कर दी हैं। 25 से 50 प्रतिशत तक नुकसान का सर्वे भी भारत सरकार की गाइड लाइंस में शामिल करने का अनुरोध किया जाएगा।
राहत आयुक्त कार्यालय में खुलेगा नियंत्रण कक्ष
सरकार ने राहत आयुक्त कार्यालय में टोल फ्री नंबर के साथ नियंत्रण कक्ष खोलने का निर्णय लिया है। नियंत्रण कक्ष में आपदा प्रभावित किसानों की समस्याओं व शिकायतों को नोट किया जाएगा और उनका समाधान कराया जाएगा।
आम व आलू के नुकसान का भी होगा आकलन
सरकार बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से आम और आलू की फसलों के नुकसान का भी आकलन कराएगी। जिलाधिकारियों से आकलन रिपोर्ट शीघ्र भेजने के निर्देश दिए गए हैं।