फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

...तो क्या यूपी में थम जाएगा विकास का पहिया

Mon, 29 Dec 2014 12:47 AM IST
महेंद्र तिवारी/अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
विज्ञापन
राज्य सरकार ने केंद्रीय सहायता से चलने वाली विभिन्न योजनाओं के लिए वित्त वर्ष 2014-15 में 45620.20 करोड़ रुपये की मदद मांगी थी। लेकिन केंद्र ने सिर्फ 29,049 करोड़ की सहायता को ही स्वीकृति दी है।
विज्ञापन


हालांकि यह रकम पिछले साल दी गई केंद्रीय सहायता से 2,276 करोड़ रुपये अधिक है। शासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि केंद्रीय योजना आयोग की ओर से स्वीकृत सहायता उम्मीद से बेहद कम है। कई योजनाओं के लिए एक पाई भी स्वीकृत नहीं किया गया है। इससे कई लंबित परियोजनाओं पर असर पड़ने की संभावना है।

प्रदेश सरकार ने केंद्र सरकार की उच्च प्राथमिकता वाली फ्लैगशिप स्कीम के लिए 32,981 करोड़ रुपये की मांगे थे। केंद्र ने सिर्फ 23,054 करोड़ रुपये ही मंजूर किए।
विज्ञापन


सामान्य केंद्रीय सहायता, बुंदेलखंड पैकेज और वाह्य सहायतित योजनाओं जैसे एक दर्जन स्कीमों के लिए 4083.85 करोड़ रुपये की मांग की गई थी।

इसमें सिर्फ 3294.56 करोड़ स्वीकृत हुए हैं। इसके अलावा विभिन्न विभागों के अंतर्गत संचालित केंद्रीय सहायता वाली अन्य योजनाओं के लिए 8554.45 करोड़ मांगे गए थे, लेकिन केंद्र ने 2700.73 करोड़ रुपये ही मंजूर किए।

नजर आने लगा केंद्र और प्रदेश के बीच 'मन भेद'

केंद्र और प्रदेश के बीच ‘मन भेद’ का असर केंद्रीय सहायता वाली योजनाओं पर नजर आने लगा है। कई फ्लैगशिप स्कीम में केंद्रीय सहायता उम्मीद से बेहद कम मंजूर हुई है तो कई योजनाओं में स्वीकृति मिली है तो रफ्तार से रकम जारी नहीं हो रही है।

प्रदेश को निर्मल भारत अभियान, राजीव गांधी पंचायत सशक्तीकरण योजना व इंटीग्रेटेड वाटरशेड मैनेजमेंट प्रोग्राम के लिए चालू वित्त वर्ष में नवंबर तक एक पाई भी नहीं मिला। नेशनल डेयरी डवलपमेंट प्लान, मनरेगा, जेएनएनयूआरएम व एनआरएचएम जैसे कार्यक्रमों के लिए जो बजट मंजूर किया, वित्त वर्ष का दो तिहाई वक्त बीतने के बाद भी बड़ा हिस्सा जारी नहीं किया गया है।

एक तथ्य यह भी है कि प्रदेश ने जो 29,049 करोड़ की सहायता पर सहमति दी है उसमें नवंबर तक सिर्फ 16081.45 करोड़ रुपये ही जारी किए गए हैं।

ये हुआ अखिलेश की उम्मीदों का हाल

वित्तीय वर्ष--मिलने की उम्मीद--मिली रकम (करोड़ में)
2013-14--40009.04--26773.02
2014-15--45620.20--29049.90 (स्वीकृत फंड)

मंजूर सहायता जारी करने का बुरा हाल (आंकड़े करोड़ में)
कार्यक्रम/योजना--स्वीकृत सहायता--जारी स्वीकृतियां (नवंबर तक)

मनरेगा--4795.61--1374.41
सिंचाई व जल संसाधन--1072.00--274.14
जेएनएनयूआरएम--581.54--20.55
एनआरएचएम--2665.89--672.38

निर्मल भारत अभियान--260.71
नेशनल डेयरी डवलपमेंट प्लान--24.34
मेडिकल एजुकेशन (आयुष)--39.13
पुलिस आधुनिकीकरण--116.79
स्किल डवलपमेंट मिशन--9.22
रेशम उत्पादन--9.23
विज्ञापन

जरूरी होने पर मदद बढ़वाने का प्रयास करें

इस पर मुख्य सचिव आलोक रंजन का कहना है कि केंद्रीय योजना आयोग ने केंद्रीय सहायता वाली योजनाओं में राज्य सरकार को अवमुक्त की जाने वाली सहायता की जानकारी दी है।

शासन के अधिकारियों से कहा गया है कि वे विभाग स्तर पर परीक्षण कर लें कि समुचित अंश उपलब्ध हो रहा है या नहीं। साथ ही निर्देशित किया गया है कि जहां जरूरी हो वहां भारत सरकार के संबंधित मंत्रालयों से संपर्क कर आवंटन बढ़वाने का प्रयास करें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें