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टैक्स वसूली में पिछड़ा यूपी, बढ़ेंगी चुनौतियां

Sat, 28 Nov 2015 02:19 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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प्रदेश सरकार को वित्तीय वर्ष 2016-17 में चुनावी साल का बजट बनाना है। इसमें विकास योजनाओं के लिए ज्यादा पैसे की जरूरत होगी। सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों पर अमल की खातिर वेतन, पेंशन और भत्तों के लिए पहले से ज्यादा बजट का बंदोबस्त करना होगा, पर सरकार की आमदनी के सबसे बड़े स्रोत राजस्व वसूली की हालत बेहद खस्ता है।
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वित्त वर्ष का दो तिहाई वक्त बीत चुका है, लेकिन सर्वाधिक आय वाले कर राजस्व की वसूली 45 फीसदी पर अटकी हुई है तो करेतर राजस्व वसूली 27.6 प्रतिशत ही हो पाई है। यह अक्तूबर तक लक्ष्य से क्रमश: 15 से 72 फीसदी कम है। वहीं औसत वसूली 17503 करोड़ पीछे चल रही है।

प्रदेश की आय का सबसे बड़ा हिस्सा राज्य कर से आता है। बजट में इसकी करीब 31.40 फीसदी हिस्सेदारी हो रही है। करेतर राजस्व का योगदान 7.4 फीसदी तक है। वर्ष 2015-16 के बजट में कर राजस्व के रूप में पिछले वित्त वर्ष से करीब 21 फीसदी ज्यादा वसूली का अनुमान लगाया गया था।
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औसत से भी कम हुई वसूली

इसके लिए कर राजस्व से 93330 करोड़ और करेतर राजस्व से 16970.32 करोड़ यानी कुल 110300 करोड़ आय की उम्मीद की गई थी। औसत के हिसाब से चालू वित्त वर्ष के सात महीनों में 64341 करोड़ की वसूली हो जानी चाहिए, पर अक्तूबर तक सिर्फ 46838 करोड़ की ही वसूली हो पाई है। यह औसत से 17503 करोड़ कम है।

वित्तीय मामलों के जानकार बताते हैं कि राजस्व वसूली का पिछला अनुभव भी बहुत अच्छा नहीं रहा है। 2013-14 में कर राजस्व की वसूली लक्ष्य से करीब आठ फीसदी कम हो पाई थी। 2014-15 के अंतिम आंकड़े अगले आम बजट में पता चलेंगे। इस बीच राज्य का कामकाज सामान्य तरीके से चलता रहा है।

मगर, इस बार यदि वसूली में ऐसी ही कमी रही तो चुनावी बजट पर सीधा असर पड़ेगा। सातवें वेतन आयोग की मौजूदा सिफारिशों के हिसाब से वित्त वर्ष 2016-17 में सरकार को वेतन, भत्ते व पेंशन के लिए 26573 करोड़ रुपये अतिरिक्त जुटाने होंगे।

इसी तरह चुनावी साल में लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे, लखनऊ मेट्रो जैसे प्रोजेक्ट के साथ लुभावनी नई योजनाओं व परियोजनाओं के लिए भी अतिरिक्त बजट का उपाय करना होगा।
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इन क्षेत्रों में ये है वसूली का हाल

मुख्य मदों में वसूली का हाल (रुपये करोड़ में)--(कर राजस्व)
विभाग का नाम--लक्ष्य--वसूली--लक्ष्य के मुकाबले प्राप्ति प्रतिशत
वाणिज्य कर--53500--24634--46
आबकारी--17500--7238--41.4
स्टांप व निबंधन--15000--6947--46.3

परिवहन--4800--2365--49.3
मनोरंजन कर--600--333--55.5
भू-राजस्व--870--376--43.3
पर्यटन--60--23--37.9
अन्य प्राप्तियां--1000--231--23.1

कुल योग--93330--42147.68--45.2

वसूली बढ़ाने के लिए उठाए कदम
सरकार ने राजस्व वसूली बढ़ाने के लिए दो तात्कालिक कदम उठाए हैं। शासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि व्यावसायिक संपत्तियों के मूल्यांकन की पुरानी व्यवस्था में विसंगति की वजह से बड़ी संख्या में रजिस्ट्री ठप पड़ी हुई थी।

सरकार ने ऐसी संपत्तियों के मूल्यांकन की नई व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है। उम्मीद है कि इससे स्टांप व निबंधन से होने वाली आय में इजाफा होगा। वहीं, वसूली में प्रोत्साहन के लिए ज्यादा जिलों को पुरस्कृत करने का फैसला किया गया है।
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