प्रदेश में लेखपालों के करीब 7000 पद खाली हैं। जिनकी भर्ती शासन केंद्रीयकृत व्यवस्था के तहत करना चाहता है, इसलिए माना जा रहा है कि भर्ती प्रक्रिया बदली जाएगी।
हालांकि शासन और राजस्व परिषद के बीच प्रस्ताव पर एकराय न हो पाने की वजह से मामला मुख्य सचिव के पास पहुंच गया है।
अब 22 मई को मुख्य सचिव जावेद उस्मानी की अध्यक्षता में प्रस्तावित बैठक में इस संबंध में फैसला होने की संभावना है।
शासन इन पदों पर भर्ती के लिए करीब डेढ़ साल से तैयारी के दावे करता रहा है। राजस्व परिषद को भर्ती कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस बीच विभागीय मंत्री के साथ ही परिषद के तीन-तीन सचिव भी बदल गए।
ऐसा है परीक्षा का पैटर्न
राजस्व विभाग के सूत्रों का कहना है कि वर्तमान नियमावली में भर्ती कराने की जिम्मेदारी जिलाधिकारियों के पास है।
90 नंबर के बहुविकल्पीय प्रश्नों की परीक्षा और 10 नंबर के साक्षात्कार के जरिये भर्ती का प्रावधान है, लेकिन शासन प्रदेश स्तर पर केंद्रीयकृत व्यवस्था के अंतर्गत एक भर्ती एजेंसी के जरिये परीक्षा और साक्षात्कार कराना चाहता है। इसके लिए नियमावली में बदलाव करना होगा।
सहकारिता विभाग से जुड़ी एक एजेंसी के नाम पर कई दौर की चर्चा भी हो चुकी है, लेकिन सहमति नहीं बन सकी।
सरकार लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के तुरंत बाद भर्ती प्रक्रिया शुरू करना चाहती है। इसे देखते हुए शीघ्र ही इस संबंध में फैसला लिया जा सकता है।
पहले भी दिया गया आदेश
इसके पहले दिसंबर में भी शासन ने राजस्व परिषद को लेखपालों के रिक्त पदों पर भर्ती के लिए प्रक्रिया तेज करने का निर्देश दिए थे।
इस संबंध में जानकार यह भी बताते हैं कि लिखित परीक्षा के लिए परीक्षा एजेंसी तय न हो पाने की वजह से प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही थी।
वहीं एक एजेंसी का नाम सामने आने पर राजस्व विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस एजेंसी के पास इतनी बड़ी परीक्षा कराने का अनुभव न होने और इस परीक्षा के लिहाज से आवश्यक संसाधन न होने को लेकर सवाल उठाए थे।
टीईटी पर भी फंसा पेंच
लेखपाल भर्ती की तरह ही टीईटी का भी पेंच फंसा हुआ है। जिस पर बेसिक शिक्षा विभाग ने तय किया है कि चुनाव आचार संहिता खत्म होने के बाद ही रिजल्ट जारी किया जाए।
हालांकि, कुछ अधिकारियों का मानना है कि मतदान समाप्त हो चुका है और आरक्षित वर्ग को 82 अंक पर पास करने के संबंध में चुनाव आयोग से अनुमति भी मिल चुकी है, इसलिए आचार संहिता का पेंच नहीं फंसेगा।
गौरतलब है कि जून 2013 में प्रदेश के 872 परीक्षा केंद्रों पर टीईटी हुई थी, जिसमें 7,65,634 परीक्षार्थी शामिल हुए थे।
नियमानुसार टीईटी का रिजल्ट अक्तूबर 2013 तक ही जारी हो जाना चाहिए था, लेकिन विभागीय अधिकारियों की लापरवाही से इसे जारी नहीं किया जा सका।