सीएम योगी ने कहा, सदन में हम जो बोलते है, समाप्त नहीं होता है। उस शब्द को अमरता प्रदान करने का माध्यम विधान सभा है। सदन की कार्यवाही के रूप में शब्दों की धरोहर बनती है। जब तक भारत के लोकतंत्र का इतिहास अक्षुण रहेगा, सदस्यों द्वारा सदन में बोली गई बातें सुरक्षित रहेंगी। इसलिए सदस्यों के सुझाव प्रभावी, महत्वपूर्ण और प्रदेश के लिए कल्याणकारी होने चाहिएं। संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने सदन के निविघ्न संचालन में सहयोग करने की अपील की।
'राज्यपाल का अभिभाषण शांति से सुनने की परिपाटी डालें'
विधानसभा अध्यक्ष ह्रदय नारायण दीक्षित ने कहा कि लोकतंत्र दृष्टि से उत्तर प्रदेश का देश में महत्वपूर्ण स्थान रहा है। सदन की कार्यवाही सुचारू चलती है तो आम जनता को बड़ा लाभ होता है। वैसे, विधान सभा की दृष्टि से विपक्ष और सत्ता पक्ष अलग-अलग नहीं होते हैं। वे एक ही अंग हैं। सदन की कार्यवाही चलने से सरकार को फायदा होता है, जानकारियां बढ़ती है। विपक्ष को जानकारियां साक्षा करने से फायदा होता है।
विपक्ष अपना पक्ष, कार्यक्रम व सुझाव रख सकता है। उन्होंने सभी दलीय नेताओं से अनुरोध किया कि वे सदन में अपना पक्ष शालीनता व मर्यादा के साथ रखे। प्रेमपूर्ण वातावरण में सदन में बहस हो। प्रश्नोत्तर के समय अधिक से अधिक प्रश्न विचार के लिए आ सके। दीक्षित ने राज्यपाल के अभिभाषण को सदन में शांतिपूर्ण सुनने की परिपाटी विकसित करते हुए सदन को गरिमामय बनाने की भी अपील की।
सर्वदलीय बैठक में नेता विरोधी दल रामगोविंद चौधरी के स्थान पर उज्जवल रमण सिंह, बसपा के लाल जी वर्मा और कांग्रेस की नेता आराधना मिश्र मोना के साथ पर नरेश सैनी और अपना दल एस के नेता नील रतन पटेल ने भाग लिया। लाल जी वर्मा ने कहा कि जितने दिनों तक सदन चलाने की घोषणा हुई है, उतने दिन सदन अवश्य चलना चाहिए। विपक्ष को सभी मुद्दों को शांतिपूर्वक रखने का अवसर प्राप्त होना चाहिए।
उन्होंने सदन को गरिमामय ढंग से संचालित करने में सहयोग देने का आश्वासन दिया। सपा के उज्जवल रमण सिंह ने विधेयकों को प्रथम प्रहर में लिए जाने के लिए अपना सुझाव रखते हुए सहयोग का मंतव्य दोहराया। कांग्रेस के नरेश सैनी और अपना दल एस के नील रतन पटेल ने कहा कि वे सदन के संचालन में सकारात्मक सहयोग देंगे।
अभिभाषण कल, बजट 18 को
विधानसभा की कार्यमंत्रणा समिति में 13 फरवरी से 7 मार्च तक घोषित कार्यक्रमों पर चर्चा हुई। विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने बताया कि 13 फरवरी को 11 बजे दोनों सदनों के संयुक्त अधिवेशन में राज्यपाल का अभिभाषण होगा। 14, 17, 18 एवं 19 फरवरी को राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा होगी। 18 फरवरी को 11 बजे वर्ष 2020-21 के आय-व्यय (बजट) का प्रस्तुतीकरण होगा। 20 फरवरी से सामान्य बजट पर चर्चा प्रारंभ होगी।
24, 25, 26 व 27 फरवरी को बजट पर चर्चा होगी। 28 फरवरी से 7 मार्च तक विभिन्न विभागों की अनुदान मांगों पर विचार कर उन्हें पारित किया जाएगा। 14 फरवरी को निधन पर शोक प्रस्ताव रखा जाएगा। बैठक में मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह, रमापति शास्त्री, लक्ष्मी नारायण चौधरी, स्वामी प्रसाद मौर्य, गुलाब देवी के अलावा विधान सभा के प्रमुख सचिव प्रदीप कुमार दुबे, प्रमुख सचिव संसदीय कार्य जेपी सिंह खासतौर पर उपस्थित रहे।