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विधान परिषद मंडप में कुर्सियां लगाने में घपला, नवीनीकरण समिति ने पेमेंट पर लगाई रोक

Tue, 01 Jan 2019 08:46 AM IST
शाहरुख खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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यूं तो कुर्सी पर बैठे लोगों के घपले के किस्से अक्सर सामने आते रहते हैं, पर विधान परिषद मंडप में लगाई गई नई कुर्सियों में ही घपले की शिकायत सामने आई है। इस पर नवीनीकरण समिति ने बिना तकनीकी जांच के भुगतान पर रोक लगा दी। वहीं, आनन-फानन में मंडप से कुर्सियां निकालकर मरम्मत के नाम पर गुरुग्राम भेज दी गई हैं।
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विधान परिषद मंडप में फॉल्स सीलिंग गिरने के बाद चालू वित्त वर्ष में इसके नवीनीकरण के लिए 5 करोड़ 4 लाख रुपये स्वीकृत किए गए थे। 3 करोड़ रुपये की पहली किस्त भी जारी कर दी गई। अभी तक दो करोड़ रुपये सिविल वर्क और एक करोड़ रुपये फर्नीचर (कुर्सियां, सोफे और मेजें) पर खर्च हो चुके हैं। विधान परिषद मंडल में कुल 110 कुर्सियां डाली गईं, जिन्हें एक नामी ब्रांड का बताया गया।

बता दें, विधान परिषद मंडप में कामों की देखरेख और गुणवत्ता को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सभापति रमेश यादव ने एक सर्वदलीय समिति बनाई थी। इस समिति के अध्यक्ष भाजपा के विधान परिषद सदस्य यज्ञदत्त शर्मा बनाए गए। इसमें कांग्रेस के एमएलसी दीपक सिंह, बसपा के धर्मवीर सिंह ‘अशोक’ और सपा के असीम यादव बतौर सदस्य शामिल किए गए। 
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शीतकालीन सत्र शुरू होने से पहले समिति के सदस्यों ने कुर्सियों व सोफों की गुणवत्ता पर सवाल उठाए। दीपक सिंह ने कहा, जिस ब्रांड की यह कुर्सियां बताई जा रही हैं, उसका सिर्फ लेबल लगा प्रतीत होता है। क्वालिटी उस ब्रांड के नाम के अनुसार नहीं है।
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इस पर समिति के अध्यक्ष यज्ञदत्त शर्मा ने लिखित आदेश किया कि बिना तकनीकी जांच के कोई भुगतान न किया जाए। साथ ही यह भी फैसला किया गया कि संबंधित अधिकारी और इंजीनियर समिति सदस्यों के सामने उपस्थित होकर स्थिति स्पष्ट करें। 

नवीनीकरण समिति की अगली बैठक 9 जनवरी को होगी। इससे पहले ही शनिवार की छुट्टी में इन कुर्सियों को निकालकर आपूर्ति करने वाली कंपनी को गुरुग्राम भेज दिया गया। कहा जा रहा है कि मरम्मत के बाद इन्हें यहां लगा दिया जाएगा। वहीं, जानकारों का कहना है कि जांच तो इसकी होनी चाहिए कि नई कुर्सियों की इतनी जल्दी मरम्मत की जरूरत क्यों पड़ी।

वर्जन : 
विधान परिषद मंडप में लगाई गई कुर्सियां व सोफों की गुणवत्ता को लेकर शिकायत मिली थी। इस पर विचार करने के लिए 9 जनवरी को समिति की बैठक बुलाई गई है। उस दिन ही यह जानकारी ली जाएगी कि कुर्सियां बाहर क्यों और किस लिए भेजी गईं। 
-यज्ञदत्त शर्मा, अध्यक्ष, नवीनीकरण समिति, विधान परिषद
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मैंने कुर्सियों की गुणवत्ता को लेकर शिकायत की थी। कहा था, जिस ब्रांड की कुर्सियां बताई जा रही हैं, ये उस ब्रांड की नहीं हैं। समिति अध्यक्ष ने जांच कराने के लिए कहा था। इससे पहले ही कुर्सियां बाहर भेजना शिकायत की सत्यता की पुष्टि करती हैं। 
-दीपक सिंह, सदस्य, नवीनीकरण समिति, विधान परिषद

विधान परिषद मंडप के नवीनीकरण के लिए 5 करोड़ 4 लाख रुपये स्वीकृत हुए थे। पर, यह काम हमने 3 करोड़ में ही पूरा कर दिया। जो चीज पुन: उपयोग लायक थी, उसे काम में ले आए। कुर्सियों का एलाइनमेंट ठीक नहीं था, इसे ठीक करने के लिए गुरुग्राम भेजा गया है। जिस ब्रांड की कुर्सियां बताई गईं थीं, समिति सदस्यों को चेक कराकर उसी ब्रांड की कुर्सियां मंगाई गईं। 
-सुरेश कुमार दुबे, अवर अभियंता (सिविल), विधान भवन/मुख्य भवन

ये कुर्सियां मेरे चार्ज लेने से पहले खरीदी गईं थीं। इसलिए इस बारे में कुछ भी बता पाने में असमर्थ हूं। 
-प्रताप नारायण द्विवेदी, व्यवस्थाधिकारी, विधान परिषद, सचिवालय
 
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