छात्राओं को आत्मरक्षा के गुर सिखातीं कंचन यादव। -संवाद
लखनऊ। आज के दौर में जितना जरूरी है आत्मनिर्भर बनना उतना ही आवश्यक है आत्मरक्षा के गुर सीखना। सेल्फ डिफेंस कोई रॉकेट साइंस नहीं है। छोटी-छोटी आसान ट्रिक को सीखकर कोई भी अपनी सुरक्षा आसानी से कर सकता है। मनचलों को मात दे सकता है...।
इन प्रेरणादायक शब्दों के साथ जब बालागंज ताइक्वांडो अकादमी (बीटीसी) की प्रशिक्षक कंचन यादव ने आत्मरक्षा का प्रशिक्षण देना शुरू किया तो छात्राओं का उत्साह दोगुना हो गया। छात्राओं ने अपराजिता बनकर आत्मरक्षा की बारीकियों को सीखा। मौका था अमर उजाला अपराजिता कार्यक्रम के तहत शुक्रवार को हीवेट पॉलीटेक्निक महानगर में आयोजित आत्मरक्षा प्रशिक्षण शिविर का।
प्रशिक्षक कंचन यादव ने छात्राओं को रैपलिंग एस्केप (हमलावर की पकड़ से तुरंत निकलना), की-पॉइंट स्ट्राइक (शरीर के संवेदनशील हिस्सों पर प्रभावी वार करना), एंटी-मोलेस्टेशन मूव्स (अचानक हमले की स्थिति में तुरंत पलटवार करना) आदि तकनीक का अभ्यास कराया। कहा कि खुद को कमजोर समझना सबसे बड़ी हार है। अपने डर को ताकत में बदलें। आपका आत्मविश्वास ही आपका पहला और सबसे बड़ा ब्रह्मास्त्र है। इस सोच से कोई भी बेटी और महिला आसानी से आत्मरक्षा करना सीख सकती है।
प्रशिक्षण के दौरान छात्राओं ने विभिन्न स्थितियों में बचाव की जानकारी हासिल की। प्रधानाचार्य कुंदन सिंह ने अमर उजाला का धन्यवाद करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम से छात्राओं का आत्मविश्वास बढ़ता है। अमर उजाला की ओर से सभी छात्राओं को लीफलेट देकर कैंसर के प्रति जागरूक किया गया। शिक्षकों को किताब भेंट की गई। शिक्षिका डॉ. सुरुचि मिश्रा और डॉ. फातिमा व सभी छात्राएं मौजूद रहीं।
छात्राओं को आत्मरक्षा के गुर सिखातीं कंचन यादव। -संवाद
छात्राओं को आत्मरक्षा के गुर सिखातीं कंचन यादव। -संवाद
छात्राओं को आत्मरक्षा के गुर सिखातीं कंचन यादव। -संवाद
छात्राओं को आत्मरक्षा के गुर सिखातीं कंचन यादव। -संवाद