लखनऊ। उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्त्व विभाग की ओर से छतर मंजिल परिसर में आयोजित मनका बनाने की दो दिवसीय कार्यशाला का शुक्रवार को समापन हुआ। कार्यशाला के अंतिम दिन शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने हड़प्पा काल में पत्थरों से मनके बनाने की तकनीक का व्यावहारिक प्रशिक्षण लिया।
प्रशिक्षक अनवर हुसैन और प्रताप ने पत्थरों को आकार देने से लेकर उन्हें चिकना बनाने की प्रक्रिया समझाई। विद्यार्थियों ने भैंस के सींग से बने हल्के हथौड़े की मदद से कच्चे पत्थर को मनचाहा आकार दिया। इसके बाद ग्राइंडर पर लगे शार्पिंग स्टोन से पत्थर को घिसकर उसकी सतह को बारीक और चिकना बनाया गया। फिर इसी पत्थर की पॉलिश कर उसे चमकदार बनाना भी सिखाया गया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों ने खुद इन प्रक्रियाओं को आजमाया। उन्होंने जाना कि पत्थर से मनका तैयार करने में धैर्य और बारीकी से काम करना पड़ता है। इस तकनीक से तैयार मनकों का इस्तेमाल माला, ब्रेसलेट और ईयर रिंग जैसे आभूषण बनाने में किया जा सकता है। कार्यशाला के अंत में उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्त्व विभाग के उत्खनन व अन्वेषण अधिकारी राम विनय ने प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र दिए।
कार्यशाला में मनका बनाने का दिया गया प्रशिक्षण
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कार्यशाला में मनका बनाने का दिया गया प्रशिक्षण
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