मौका ताड़कर किसी भी रंग में रंग जाने वाले एक जुगाड़ू दल के नेताजी अपनी ही पार्टी के प्रवक्ता से परेशान हैं।
नेता जी ने प्रवक्ता को उनके नाम और पार्टी के काम के प्रचार प्रसार का जिम्मा सौंपा था लेकिन प्रवक्ता साहब नेताजी को भूल खुद पर ही बलिहारी हैं। नेताजी के प्रेस नोट के साथ अपने नाम वाला प्रेस नोट भेजना नहीं भूलते।
अब तो उन्होंने नेताजी को भी किनारे कर दिया है और सिर्फ अपना ही नाम चला रहे हैं। फिर चाहे वो उत्तराखंड आपदा का मामला हो या मंत्रिमंडल विस्तार का। प्रेस नोट में नेता जी कहीं नजर ही नहीं आए।
अब नेता जी प्रवक्ता को लेकर पसोपेश में हैं। समझ नहीं पा रहे हैं कि कुछ कहें या यूं ही सहते रहें।
सूबे में पार्टी की कमान संभालने वाले नेताजी ने इतने मोर्चे खोल लिए हैं कि अब प्रवक्ता से पंगा लेने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।