बंग्ला बाजार रोड पर रतनलोक अपार्टमेंट
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कानपुर रोड की आवासीय योजनाओं में व्यावसायिक भूखंडों पर बनाए गए सात अपार्टमेंट के 1154 फ्लैट्स की कीमत कम करने का एलडीए ने नया तरीका निकाला है। इससे आठ से 20 प्रतिशत यानी छह लाख से 14 लाख रुपये तक फ्लैटों की कीमतें कम की जा सकेंगी। इन फ्लैटों की कीमत 36 लाख (1बीएचके) से 70 लाख रुपये (3बीएचके) तक है।
एलडीए के अधिकारियों का कहना है कि पूर्व में व्यावसायिक उपयोग के लिए योजनाओं में छोड़े गए भूखंडों पर अपार्टमेंट बनाने का जमकर खेल हुआ। इससे जो जमीन फ्लैट बनाने में उपयोग हुई उसकी कीमत आवासीय भू-उपयोग की जमीन से दो से तीन गुना तक अधिक होने के कारण फ्लैटों की कीमत बढ़ गई। इसका असर यह हुआ कि एलडीए के बनाए फ्लैटों की कीमत मार्केट से डेढ़ गुना तक अधिक हो गई और एलडीए को अपने फ्लैट बेचना मुश्किल हो गया। करीब 80 प्रतिशत फ्लैट बिना बिक्री के पड़े हैं।
एयरपोर्ट से बदला जा रहा भू-उपयोग
वीसी प्रभु एन सिंह ने बताया कि फ्लैटों की कीमतें कम करने के लिए जरूरी है कि परियोजना लागत में आवासीय भू-उपयोग की जमीन शामिल की जाए। हम एयरपोर्ट से करीब 30 एकड़ जमीन खरीद रहे हैं। इस जमीन का भू-उपयोग व्यावसायिक रखा जाएगा। जिन अपार्टमेंट को व्यावसायिक उपयोग के भूखंडों पर बनाया गया, उनके भू-उपयोग को यहां की जमीन से बदल दिया जाएगा। इससे अपार्टमेंट की लागत में शामिल जमीन की कीमत को घटा लिया जाएगा। इससे फ्लैटों की कीमत काफी कम हो जाएगी।
2015 से 2017 के बीच में शुरू हुए निर्माण
फ्लैटों का निर्माण आवासीय की तुलना में महंगे व्यावसायिक भूखंडों पर किया गया। यह केवल एक या दो अपार्टमेंट तक सीमित नहीं हुआ। एलडीए की रिपोर्ट के मुताबिक अब तक सात अपार्टमेंट में यह कारनामा सामने आ चुका है। यह सभी अपार्टमेंट कानपुर रोड की शारदानगर योजना, मानसरोवर योजना, आशियाना योजना में बने हैं। यह निर्माण 2015 से 2017 के बीच शुरू कराए गए।
...तो रु 400 करोड़ कमीशन में बंटे
एलडीए के सूत्रों की मानें तो जिस समय यह निर्माण बिना मांग के कराए गए, उस समय एलडीए में 40 प्रतिशत से अधिक तक ठेकों में कमीशन चल रहा था। अगर इस सच्चाई को मानें तो 1000 करोड़ रुपये के कामों में सिर्फ 400 करोड़ रुपये कमीशन में बंटे। इससे तो यही समझ आता है कि इन फ्लैटों का निर्माण लोगों की जरूरत से अधिक कमीशन की उगाही के लिए किया गया।
कहां कितने फ्लैट बनाए गए
रतनलोक - 365
रश्मिलोक - 156
आद्रा - 78
अश्लेषा - 178
पूर्वा - 78
फाल्गुनी - 42
भरणी - 60
दीपशिखा (सी-8 पर प्रस्तावित नाम) - 147
अमर उजाला लाया सच सामने
एलडीए के पूर्व अधिकारियों और इंजीनियर्स की सांठगांठ से हुए कारनामे का सच अमर उजाला सामने लाया था। 2018 में तीन फरवरी, 20 फरवरी के अलावा दूसरी तारीखों में प्रकाशित हुई खबरों में पूर्व इंजीनियर्स, पूर्व अधिकारियों के कारनामों को उजागर किया। यह भी बताया गया कि कैसे व्यावसायिक भूखंडों पर फ्लैट बनाने से कीमतें बढ़ गईं। इसके बाद कीमतों को कम करने की कवायद नए वीसी प्रभु एन सिंह ने शुरू की।
भू-उपयोग बदलने की योजना
सात अपार्टमेंट के करीब 1154 फ्लैटों की जमीन का भू-उपयोग बदलने की योजना है। यह अपार्टमेंट व्यावसायिक भू-उपयोग की जमीन पर बना दिए गए थे। कीमतों में करीब आठ से 20 प्रतिशत तक कमी आ सकती है।
- आरडी राय, अधिशासी अभियंता, एलडीए
'एलडीए के वीसी प्रभु एन सिंह कहते हैं कि जिन अपार्टमेंट को व्यावसायिक उपयोग के भूखंड़ों पर बना दिया गया। उनके पूर्व के व्यावसायिक भू-उपयोग को एयरपोर्ट पर ली जा रही जमीन से बदल कर आवासीय करने का प्रस्ताव है। इससे हमारे फ्लैट कम कीमत होने पर बिक सकेंगे।'