लखनऊ। शहरवासी अब जान सकेंगे कि कॉलोनी में वे जो मकान खरीद रहे हैं, उसे मानचित्र के हिसाब से बनाया गया है या नहीं। इसके लिए एलडीए सभी आवासीय कॉलोनियों के नक्शे डिजिटल करेगा। साल के अंत तक यह सुविधा शुरू हो जाएगी।
इसके बाद बिल्डर किसी को ठग भी नहीं पाएंगे। एलडीए नई के अलावा 50 वर्ष पहले बनीं कॉलोनियों को भी डिजिटल करेगा।
एलडीए इन दिनों अपनी कॉलोनियों व अपार्टमेंटों के करीब 600 मानचित्र डिजिटल कर रहा है। इसके अलावा अभी तक करीब एक हजार निजी बिल्डरों के नक्शे पास किए हैं। प्राधिकरण इन्हें भी डिजिटल करेगा। फिर कोई भी ये नक्शे देखने के साथ उनका प्रिंट निकाल सकेगा।
कॉलोनियों के नक्शे को एलडीए के मास्टर प्लान से भी जोड़ा जाएगा। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि लोग बिल्डरों की ठगी से बचेंगे। आसानी से पता किया जा सकेगा कि कॉलोनी की कितनी जमीन का नक्शा पास है। उसका भू-उपयोग क्या है और कहीं उसमें सरकारी जमीन तो नहीं शामिल है। इस सुविधा से एलडीए में नक्शे ढूंढने में भी आसानी होगी। डिजिटल नक्शों में कोई छेड़छाड़ भी नहीं कर सकेगा।
वीसी ने काम में तेजी लाने के दिए निर्देश
मानचित्रों को डिजिटल करने को लेकर एलडीए वीसी प्रथमेश कुमार ने शुक्रवार को बैठक की। इसमें अपर सचिव ज्ञानेन्द्र वर्मा, सहायक अभियंता अतुल शर्मा, ओएसडी आईटी सेल तथा पीएमसी टीम के सदस्य शामिल थे। वीसी ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए कि मानचित्रों का डिजिटल करने का काम तेज किया जाए। साल के अंत काम पूरा कर उसे एलडीए की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया जाए।