अधिकारियों के सामने कई ऐसी फाइलें आई हैं, जिनमें लॉटरी से आवंटन कराने के लिए केवल 10 प्रतिशत पंजीकरण धनराशि जमा की गई। इसके बाद कोई किश्त जमा नहीं हुई। ऐसे में बाबुओं को आवंटी को पत्र भेजकर आवंटन निरस्त करा देने चाहिए थे, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। ऐसे में बाबुओं की मिलीभगत सामने आ रही है।
...तो कीमत से ज्यादा होगा बकाया
एलडीए में रजिस्ट्री नहीं कराने के पीछे एक कारण यह भी सामने आ रहा है कि पिछले तीन साल से ओटीएस लागू नहीं हुआ। ऐसे में लोगों को बकाया किश्तों के भुगतान में देरी पर 18 प्रतिशत तक का चक्रवृद्धि ब्याज देना होगा। इसकी वजह से बकाया अब मूलधन व ब्याज सहित इतना अधिक हो गया है कि फ्लैटों की रीसेल में कीमत इससे काफी कम है। इसकी वजह से भी कोई आवंटी रजिस्ट्री कराने को तैयार नहीं है। इसे देखते हुए अब एलडीए के पास आवंटन निरस्त कर दोबारा से प्रक्रिया शुरू कर नए ग्राहकों को मौका देने का ही विकल्प बचता है।
नेहरू एंक्लेव का नाम ही सूची से गायब
एलडीए की सूची बनाने में भी बाबुओं ने घालमेल कर दिया। नेहरू एंक्लेव योजना में ऐसे बड़ी संख्या में फ्लैट मौजूद हैं, जिनकी रजिस्ट्री नहीं हुई है। यहां भी बाबुओं ने खुद अपने या परिवारीजनों के नाम से आवंटन कराए हैं, जिनमें केवल पंजीकरण धनराशि जमा है। यहां अगर जांच कराई जाए तो काफी फ्लैट सामने आ जाएंगे।
फ्लैटों की रजिस्ट्री न कराने से जहां एलडीए को आर्थिक नुकसान है, वहीं अपार्टमेंट की देखरेख में भी दिक्कत आती है। गोमतीनगर विस्तार में गंगा अपार्टमेंट की आरडब्ल्यूए की अध्यक्ष विभा शर्मा का कहना है कि काफी फ्लैट खाली पड़े हैं। ऐसे में वहां से सोसाइटी के शुल्क भी नहीं मिलते हैं। इससे अपार्टमेंट के जरूरी काम जैसे सफाई, सुरक्षा, लिफ्ट संचालन तक के खर्चे नहीं निकल पाते हैं।
भेजे जाने लगे आवंटियों को नोटिस
सूची तैयार होने के बाद अब आवंटियों को नोटिस भेजना शुरू किया जा रहा है। उच्च अधिकारियों को भी इसकी जानकारी दे दी गई है। अगर रजिस्ट्री कराई जाए तो प्रति फ्लैट लाखों रुपये एलडीए को बकाया, फ्रीहोल्ड चार्ज व अन्य शुल्क के रूप में मिलेगा। वहीं सरकार को भी रजिस्ट्री शुल्क के रूप में बड़ा रेवेन्यू मिलेगा।
- राजेश कुमार शुक्ला, ओएसडी, एलडीए