विजयंतखंड में निजी हॉस्पिटल चंदन अस्पताल को बिना नीलामी जमीन दिए जाने की खबर लीक करने का खामियाजा पूरे विभाग के कर्मचारियों का ट्रांसफर के रूप में सामने आया है।
खबर कहां से एलडीए से बाहर गई? इसकी सजा देना एलडीए अधिकारियों ने ज्यादा जरूरी समझा। यह गलत किस अधिकारी ने किया? उनके खिलाफ कार्रवाई कब होगी? अब बड़ा सवाल यह है।
वीसी अभिषेक प्रकाश के निर्देश पर प्रभारी अधिष्ठान व अपर सचिव ज्ञानेंद्र वर्मा ने सोमवार को 42 कर्मचारियों व बाबू के ट्रांसफर आदेश जारी कर दिए। इसमें से 14 मृतक आश्रित कोटा में नौकरी पाए कर्मचारी व कनिष्ठ लिपिक हैं।
वहीं, 28 वर्तमान में अलग-अलग पटल पर तैनात अनुभाग अधिकारी, कनिष्ठ लिपिक, सुपरवाइजर हैं। सबसे अधिक चौंकाने वाले तबादले व्यावसायिक व बल्क सेल से हैं।
यहां अनुभाग अधिकारी आनंद किशोर मिश्रा सहित सात बाबुओं को हटा दिया गया है। ट्रांसफर हुए बाबुओं में राजेश कुमार निगम, नंद किशोर वर्मा, अशोक कुमार, विनोद सिंह, अतुल कपूर, विमल कुमार, सैयद हसन जरार नकवी शामिल हैं।
इनकी जगह नजूल से अनुभाग अधिकारी राम सिंह और बाबुओं में व्यावसायिक सेल में अरविंद कुमार रावत, कैलाश सिंह, राजेश कुमार गौड़, कुंज बिहारी साहू, बल्क सेल में संजय कुमार गुप्ता, यदुनाथ को भेजा गया है। व्यावसायिक व बल्क सेल से हटाए गए बाबू अब बहुमंजिला आवास व प्रधानमंत्री आवास के काम देखेंगे।
दिनेश शुक्ला अब अधिष्ठान में
कर्मचारी संघ के महामंत्री दिनेश शुक्ला को अब लोहिया पार्क से हटाकर अधिष्ठान में भेजा गया है। दिनेश शुक्ला से हाल ही में ट्रस्ट की संपत्तियां का काम हटाया गया था। मान बहादुर सिंह बाबू को प्रधानमंत्री आवास से अब रजिस्ट्री सेल, अब्दुल शमी को प्रधानमंत्री आवास से गोमतीनगर योजना का काम देखने का आदेश हुआ है। राजेश गौतम को विहित प्राधिकारी जोन-3 से हटाकर ट्रस्ट का काम दिया गया है। उनकी जगह अब जिलेदार वर्मा को गोमतीनगर योजना से हटाकर भेजा गया है।
जानिए क्या है विवाद
विजयंतखंड में एक भूखंड चंदन अस्पताल को बिना नीलामी एलडीए ने आवंटित कर दिया। अधिकारियों के कारनामे की यह खबर किसी तरह बाहर आ गई। इसके बाद आनन-फानन पैसा जमा होने के बाद भी अस्पताल का आवंटन निरस्त कर दिया गया। इस भूखंड को नीलामी के जरिए बेचने का भी फैसला कर लिया गया। हालांकि, पूरे प्रकरण की जो जांच सचिव पवन गंगवार ने की। उस जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया।
चंदन अस्पताल के प्रकरण से इन तबादलों का कोई लेना-देना नहीं है। यह एक रूटीन ट्रांसफर प्रक्रिया है। विभागीय कामों को बेहतर तरीके से कराने की जरूरत को देखते हुए यह बदलाव किया गया है।
- ज्ञानेंद्र वर्मा, अपर सचिव, एलडीए