दिनेश आनंद प्लॉट के लिए 27 साल से एलडीए का चक्कर लगा रहे हैं। इनके पिता प्रहलाद आनंद ने एलडीए की ट्रांसपोर्ट नगर योजना में प्लॉट लिया था।
जिसका पूरा पैसा भी 1980 में जमा कर दिया था। छह साल बाद 1986 में पिता की दुर्घटना में मौत हो गई। पिता की मौत के बाद जब दिनेश प्लॉट का पता करने गए तो उनको होश उड़ गए।
एलडीए के अधिकारियों ने प्लॉट की रजिस्ट्री किसी और केनाम कर दी। तब से वह एलडीए की दौड़ लगा रहे हैं। सोमवार को एलडीए की जनता अदालत में भी वह पहुंचे थे। यहां से भी वह मायूस लौटे।
जगदीश प्रसाद 26 साल से एलडीए की दौड़ लगा रहे हैं। 1987 में इनको अलीगंज सेक्टर एम में प्लॉट आवंटित हुआ था। जिसका पूरा पैसा भी जमा है।
जहां प्लॉट आवंटित हुआ था, वहां पर मंदिर था, लिहाजा कब्जा नहीं मिला। जगदीश ने दौड़भाग की तो जब पहली बार 2002 में एलडीए में जनता अदालत लगी तो उन्हें एक महीने में प्लॉट देने का वादा किया गया। यह वादा अब भी अधूरा है।
ये मामले तो बानगी है। सोमवार को एलडीए के गोमती नगर कार्यालय में आयोजित जनता अदालत में ऐसे कई आवंटी आए जो वर्षों से अपना प्लॉट और मकान पाने के लिए चक्कर लगा रहे हैं।
कहने को तो एलडीए ने अदालत में आए 193 मामलों में 109 को निस्तारित कर दिया लेकिन जो वर्षों से चक्कर काट रहे हैं, उनको राहत नहीं मिल सकी है।
ऐसे में एलडीए की जनता अदालत महज रस्म अदायगी भर सबित हो रही है। दिल्ली में रहने वाले आदित्य तिवारी पिछले आठ साल से अपनी बहन के प्लॉट की रजिस्ट्री केलिए एलडीए की दौड़ लगा रहे हैं।
मगर अब तक रजिस्ट्री नहीं हो पाई है। बार-बार दिल्ली से आने-जाने में परेशानी के साथ ही काम का नुकसान भी करना पड़ रहा है।
झल्लाये आदित्य ने जनता अदालत में एलडीए उपाध्यक्ष से नाराजगी भी जताई और यह शिकायत भी की कि बाबू पैसे की मांग करते हैं।
गोमती नगर विस्तार में रीवर व्यू योजना के आवंटी भी परेशान हैं। यहां के आवंटी केके सिंह ने बताया कि योजना में सीवर, मार्ग प्रकाश और फायर सिस्टम ठीक काम नहीं कर रहा है।
कई बार इसकी शिकायत की गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। गोमती नगर विस्तार के आवंटी सुधीर मेहरोत्रा पिछले आठ साल से एलडीए केचक्कर काट रहे हैं।
गोमती नगर विस्तार केसेक्टर पांच में उनको भूखंड आवंटित हुआ है, मगर अब तक उसकी रजिस्ट्री नहीं हो सकी है। एक तो बैंक को ब्याज के साथ कर्ज अदा करना पड़ृ रहा है और किराए के मकान में रहना पड़ रहा वह अलग।
जगदीश प्रसाद ने बताया कि वह पिछले 23 साल से चक्कर काट रहे हैं। दौड़ भाग और कानूनी कार्यवाही करने पर एलडीए ने उनको समोयाजन के तहत प्लॉट आवंटित तो किया मगर वह उनको मिला नहीं।
जो भी प्लॉट आवंटित किया वह विवादित निकला। पहली बार 2004 में, दूसरी बार 2005 में और तीसरी बार 2009 में। उनका कहना है कि एलडीए में कोई सुनवाई नहीं। जनता अदालत महज दिखावा भर है। अब तो एलडीए पर भरोसा ही नहीं रहा।