ग्रामीण इलाकों में भू-संपत्तियों की खरीद-फरोख्त में बढ़ते
फर्जीवाड़े पर रोक लगाने के लिए प्रशासन ने नयी पहल की है।
एडीएम वित्त एवं
राजस्व के निर्देश पर शुरू हो रही व्यवस्था के तहत अब किसी भू-संपत्ति के
मालिक की मृत्यु के बाद परिवार द्वारा किए जाने वाले वरासत के आवेदनों का
सत्यापन ग्राम पंचायतों में खुली चौपाल लगा कर होगा।
संबंधित लेखपाल की
जांच के बाद ही संबंधित संपत्ति का वरासत प्रमाणपत्र तहसील स्तर से जारी
किया जा सकेगा। शुरुआत मलिहाबाद तहसील से की गयी है।
समय पर वरासत जारी न
होने से मृतकों की भू- संपत्तियां फर्जी निबंधन से हड़प कर बेचे जाने के
मामले बढ़ रहे हैं।
मोहनलालगंज में तो इसका फायदा उठाते हुए 35 साल पहले मर
चुके जमींदार की दो बीघा जमीन फर्जी रजिस्ट्री से बेचने व मध्यप्रदेश के
पूर्व सीएम के नाम पर भी फर्जी रजिस्ट्री तैयार कर जमीन की खरीद-फरोख्त
करने के मामले तो चर्चा में भी रहे।