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‘पहले आओ-पहले पाओ’ योजना से नहीं बिके एलडीए के फ्लैट, अब आएगी नई योजना

Thu, 04 Jan 2018 02:32 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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फ्लैट्स - फोटो : demo pic
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बिना बिके पड़े 600 करोड़ रुपये के फ्लैटों को बेचने के लिए शुरू की गई एलडीए की ‘पहले आओ-पहले पाओ’ योजना फेल हो गई। 1443 फ्लैट इस योजना के तहत बेचने के लिए रखे गए थे, लेकिन बिके सिर्फ 37। इन फ्लैटों में ग्राहकों की कम रुचि की वजह यह सामने आई की लोगों को गोमतीनगर में फ्लैट चाहिए और अन्य जगहों पर वे 15 लाख रुपये से अधिक निवेश करने के इच्छुक नहीं हैं।

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एलडीए ने एक नवंबर 2017 से अपनी ‘पहले आओ-पहले पाओ’ योजना को शुरू किया। इसमें पहले चरण में जानकीपुरम, प्रियदर्शिनी, मानसरोवर, आशियाना और गोमतीनगर विस्तार में फ्लैट बिक्री के लिए रखे गए।

विवादित भूखंड़ों के आवंटियों को 18 से 20 प्रतिशत डिस्काउंट ऑफर करने के बाद भी इनमें से सिर्फ गोमतीनगर विस्तार के सरयू अपार्टमेंट को ही ग्राहक मिले। डिस्काउंट के साथ समायोजन में सिर्फ सरगम अपार्टमेंट जानकीपुरम योजना के ही एक फ्लैट 2बीएचके प्लस स्टडी को ही एलडीए बेच पाया।
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दूसरे चरण में 19 नवंबर को फ्लैटों की संख्या बढ़ाई गई। इस बार जानकीपुरम के जनेश्वर एंक्लेव के अलावा सस्ते फ़्लैट में सेक्टर-3 के अफॉर्डेबल हाउसिंग को भी जोड़ा गया। जनेश्वर एंक्लेव के छोटे साइज के 2बीएचके और सेक्टर-3 के अफॉर्डेबल हाउसिंग फ्लैट बिके,लेकिन इनका आंकड़ा भी दो अंकों को भी पार नहीं कर पाया।

महंगी कीमत, 12 प्रतिशत जीएसटी बनी बाधा

एलडीए के फ्लैट निजी रियल एस्टेट की तुलना में पहले ही 20 से 25 प्रतिशत तक महंगे बिक ते हैं। इसके बाद अब 12 प्रतिशत जीएसटी लगने की वजह से इनकी कीमत और अधिक बढ़ गई है। एलडीए के ‘पहले आओ पहले पाओ’ योजना में अधिकतर फ्लैटों पर 12 प्रतिशत जीएसटी लग रहा है। इससे कीमत दो लाख रु पये से लेकर सात लाख रुपये तक बढ़ जा रही है। जो फ्लैट नहीं बिक पाए, उनकी कीमत 28 लाख रुपये से लेकर 1.34 करोड़ रुपये तक है।

हर किसी की पसंद, सिर्फ गोमतीनगर 

एलडीए के एक अधिकारी ने बताया कि ‘पहले आओ-पहले पाओ योजना’ एक नया ट्रेंड सामने आया है। विशेष काउंटर पर आने वाले ग्राहकों की डिमांड सिर्फ गोमतीनगर या गोमतीनगर विस्तार इलाके की ही रही। यहां फ्लैट के लिए लोग अधिक कीमत भी चुकाने के लिए तैयार हैं। यही वजह रही कि सरयू अपार्टमेंट में महंगे होने के बाद भी फ्लैट तुरंत बिक गए।

इसकी वजह यह भी हो सकती है कि सबसे अधिक विकास शहर में इसी इलाके में हुआ है। अब ग्राहक दूसरी योजनाओं में फ्लैट खरीदना ही नहीं चाहते। दूसरी योजनाओं में जो ग्राहक लेने केलिए तैयार हुए। उन्हें 15 लाख रुपये से कम बजट में फ्लैट चाहिए। यही वजह रही कि सरगम, सोपान, जनेश्वर एंक्लेव जैसे बेहतर प्रोजेक्ट की जगह लोगों ने 12.60 लाख रुपये की कीमत के अफॉर्डेबल फ्लैटों को चुना।
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इन योजनाओं को नहीं मिले खरीदार

सरगम अपार्टमेंट-जानकीपुरम योजना, सोपान एंक्लेव-प्रियदर्शिनी योजना, मृगशिरा-मानसरोवर योजना, श्रवण अपार्टमेंट-सेक्टर ई आशियाना, जनेश्वर एंक्लेव-जानकीपुरम, आद्रा अपार्टमेंट-शारदानगर योजना, फाल्गुनी अपार्टमेंट-मानसरोवर योजना, पूर्वा अपार्टमेंट-सेक्टर एच आशियाना।
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