लखनऊ। रिश्वतखोरी में पकड़े गए एलडीए के जेई और सुपरवाइजर के खिलाफ जांच तेज हो गई है। मंगलवार को एलडीए ने विजिलेंस को अवैध निर्माणों के नक्शों की मूल फाइलें, जांच रिपोर्ट और संबंधित अनुभागों के दस्तावेज सौंप दिए। इन फाइलों के आधार पर विजिलेंस जल्द ही एलडीए के अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों को पूछताछ के लिए नोटिस भेजेगा।
विजिलेंस ने ऐसे शिकायतकर्ताओं का पूरा ब्योरा भी खंगालना शुरू किया है। शुरुआती पड़ताल में सामने आया है कि कुछ खास शिकायतकर्ता लगातार एक ही इलाके या नवनिर्मित भवनों को निशाना बना रहे हैं। सीएम पोर्टल पर मामलों की समीक्षा के दौरान यह खेल सामने आया है। अधिकारियों को शक है कि इन शिकायतों का इस्तेमाल निजी रंजिश, ठेकेदारों को डराने या अवैध वसूली के लिए हो रहा है। इससे विभागों की टीमें जांच में व्यस्त रहती हैं, जिससे वास्तविक फरियादियों के मामलों में देरी होती है।
यह है मामला
शनिवार को विजिलेंस ने एलडीए के जेई दिनेश कुमार वर्मा और सुपरवाइजर चंद्र प्रकाश को एक बिल्डिंग वाले से साढ़े सात लाख रुपये घूस लेते रंंगे हाथों पकड़ा था। इसके बाद एलडीए की टीम सोमवार को जांच के लिए एलडीए गई थी। सोमवार को एलडीए ने 50 ऐसे लोगों की सूची सौंपी थी, जो पेशेवर तरीके से आईजीआरएस पर अवैध निर्माण की शिकायत करने वालों में हैं। चर्चा है कि यह शिकायत कर वसूली करते हैं। क्योंकि विजिलेंस की टीम ने जेई और सुपरवाइजर के साथ ही श्रवण नामक एक बिचौलिये को भी पकड़ा था। इसी ने आईजीआरएस पर अवैध निर्माण की शिकायत की थी। जिसकी फाइल मंगलवार को विजिलेंस की टीम एलडीए से ले गई। यह कुछ महीनों में करीब 50 शिकायतें कर चुका है।