लखनऊ। हाईकोर्ट ने ग्रीन कॉरिडोर निर्माण मामले में ला मार्टिनियर कॉलेज की जमीन पर एलडीए को 13 मार्च तक कोई कार्रवाई करने से रोक दिया है। यह मामला कॉलेज की जमीन को बिना उचित प्रक्रिया के अधिग्रहण करने के आरोपों से संबंधित है। कोर्ट ने मंगलवार को जिलाधिकारी को भी तलब कर प्रक्रिया न अपनाने पर सख्त सवाल किए।
राज्य सरकार के मुख्य स्थायी अधिवक्ता शैलेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि कॉलेज जमीन का चिह्नीकरण तीन दिन में पूरा होगा। उन्होंने इसकी रिपोर्ट भी कोर्ट में पेश करने की बात कही। एलडीए के अधिवक्ता रत्नेश चंद्रा से भी कोर्ट ने कई सवाल पूछे। कॉलेज की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता जयदीप नारायण माथुर ने राज्य सरकार और एलडीए की कार्रवाई पर आपत्ति उठाई। कोर्ट ने पूर्व में जमीन की पैमाइश का आदेश दिया था। इस आदेश का अनुपालन न होने पर यह निर्देश जारी किया गया। मामले की अगली सुनवाई 13 मार्च को होगी।
न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने मंगलवार को ला मार्टिनियर कॉलेज की याचिका पर यह आदेश दिया। याचिका में बताया गया है कि कोठी मार्टिन साहब और गणेशगंज स्टेशन पर कॉलेज की जमीनें हैं। यहां से ग्रीन कॉरिडोर प्रोजेक्ट के तहत सड़क और फ्लाईओवर का निर्माण करने की योजना है। कॉलेज ने आरोप लगाया कि यह निर्माण संस्थान की जमीनों पर किया जा रहा है। एलडीए, जिला प्रशासन या राज्य सरकार ने सहमति नहीं ली और न ही अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू की।
हाईकोर्ट ने 27 फरवरी को संबंधित जमीनों की पैमाइश का आदेश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि उप जिलाधिकारी, सदर अधिकारियों और संस्थान के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में पैमाइश कर रिपोर्ट सौंपेंगे। 9 मार्च को सुनवाई के दौरान, कॉलेज ने एलडीए उपाध्यक्ष का 27 फरवरी का पत्र प्रस्तुत किया। इसमें संस्थान की जमीनों पर नौ पिलर के निर्माण के लिए सहमति मांगी गई थी, लेकिन पैमाइश की कोई प्रक्रिया शुरू नहीं हुई थी। इस पर कोर्ट ने जिलाधिकारी को उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया था।