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नागरिकता संशोधन कानून के समर्थन में उतरे वकील व सेवानिवृत्त जज

Sun, 22 Dec 2019 05:05 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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भारतीय विचार मंच की ओर से शनिवार को आयोजित गोष्ठी में मौजूद मोनिका अरोड़ा व अन्य। - फोटो : अमर उजाला
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सर्वोच्च न्यायालय की वरिष्ठ अधिवक्ता मोनिका अरोड़ा ने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) उन लोगों के लिए नहीं है जो पहले से ही भारत में रह रहे हैं। यह शरणार्थी के रूप में रहने वाले हिंदू, बौद्ध, सिख, पारसी और जैन समाज के उन लोगों के लिए है जो या जिनके पूर्वज पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में उत्पीड़न से परेशान होकर भारत में आए।

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उन्होंने कहा सीएए के खिलाफ अभियान चलाने वालों को पाकिस्तानी नागरिक हसीना बेन की भी बात करनी चाहिए जिन्हें अभी चार दिन पहले ही भारत की नागरिकता दी गई है। मोनिका शनिवार को गोमतीनगर विस्तार स्थित सिटी मांटेसरी स्कूल में भारतीय विचार मंच की ओर से आयोजित संगोष्ठी में बोल रही थी।

सीएए के समर्थन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पहल पर वकील, बुद्धिजीवी और सेवानिवृत्त न्यायाधीश भी मैदान में उतर पड़े हैं। संगोष्ठी इसी अभियान का हिस्सा थी। इसमें सेवानिवृत्त न्यायाधीश डॉ. डीके अरोड़ा ने कहा कि सीएए में किसी भी वर्ग विशेष की नागरिकता छीनने का कोई उल्लेख नहीं है।
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इसके बावजूद यदि उग्र प्रदर्शन कर सरकारी संपत्ति नष्ट की जा रही है तो उपद्रवियों की संपत्ति की कुर्की होनी ही चाहिए। ऐसे लोगों से वसूली कर उन्हें क्षतिपूर्ति देनी चाहिए जिनकी संपत्ति नष्ट की गई है।

नागरिकता कानून में पहले भी किये गए संशोधन

अधिवक्ता मोनिका ने कहा कि सीएए के विरोध में उपद्रव और हिंसात्मक प्रदर्शन करने वाले कांग्रेस, आप और कम्युनिस्ट पार्टी के हाथों में खेल रहे हैं। ये दल लोगों को निराधार बातें समझाकर उन्हें बरगलाने में जुटे हैं। ये दल शायद इसलिए परेशान हैं क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फैसलों से उनकी वोट बैंक की राजनीति पूरी तरह असफल होती जा रही है।

उन्होंने कहा पहले की सरकारों ने भी नागरिकता कानून में समय-समय पर संशोधन किया, लेकिन तब उसका विरोध नहीं हुआ। अब वे लोग भी विरोध में उतर आए हैं, जिनकी पार्टी के नेताओं ने सरकार में रहते इस कानून में बदलाव किए। उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. लालता प्रसाद मिश्र ने कहा कि उपद्रव व हिंसा साजिश का हिस्सा है।

संगोष्ठी में प्रांत के सह संघचालक प्रभुनारायण, क्षेत्र प्रचारक अनिल कुमार, प्रांत प्रचारक कौशल, केजीएमयू के कुलपति एमएल भट्ट, अरबी-फारसी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. फारुक मिर्जा, एकेटीयू के कुलपति विनय पाठक, विधायक सुरेश श्रीवास्तव, अपर महाधिवक्ता विनोद शाही, मुख्य स्थायी अधिवक्ता जयकृष्ण सिन्हा, महापौर संयुक्ता भाटिया, अधिवक्ता सूर्यप्रकाश सिंह सहित कई वरिष्ठ वकील, चिकित्सक , शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल थे।

संगोष्ठी का संचालन मुख्य स्थायी अधिवक्ता श्रीप्रकाश सिंह ने किया। अपर महाधिवक्ता कुलदीपपति त्रिपाठी ने आभार व्यक्त किया।
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राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने दिया समर्थन

राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद (जेएन तिवारी) ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर नागारिकता संशोधन कानून पर राज्य कर्मचारियों का पूरा समर्थन होने का आश्वासन दिया। तिवारी ने आउट सोर्सिंग कर्मचारियों के लिए जारी किए गए आदेश के लिए मुख्यमंत्री को बधाई दी। इसमें जेम पोर्टल के जरिये कर्मचारियों को लेने का फैसला किया गया है।  
 
भारत रक्षा मंच समर्थन में चलाएगा अभियान
भारत रक्षा मंच भी नागरिकता संशोधन कानून के समर्थन में मैदान में उतर आया है। रक्षा मंच सोमवार को प्रदेश भर में जिलाधिकारियों के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन देकर उन्हें यह कानून बनाने के लिए बधाई देगा। संगठन मंत्री आशीष शुक्ल ने बताया कि ज्ञापन के जरिये केंद्र सरकार को आश्वस्त किया जाएगा कि भारत रक्षा मंच देश भर में इस कानून के समर्थन में अभियान चलाएगा।
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