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आज भी कहता हूं-कानून-व्यवस्था में सुधार की जरूरत : राम नाईक

Thu, 19 Jul 2018 02:27 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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राज्यपाल राम नाईक
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राज्यपाल राम नाईक 22 जुलाई को अपना चार वर्ष का कार्यकाल पूरा करने जा रहे हैं। 84 साल की उम्र पार कर चुके नाईक का काम करने का जोश व जज्बा देखते ही बनता है। हर वक्त वह तरोताजा नजर आते हैं। संवैधानिक दायित्वों के प्रति उनकी सक्रियता कम नहीं है। 1,458 दिन के कार्यकाल में रोजाना औसतन 20 लोगों से उनकी मुलाकात हुई। रोजाना औसतन एक कार्यक्रम में शामिल हुए।

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नाईक ने साल में मिलने वाली 20 छुट्टी का इस्तेमाल भी कम किया। पहले साल 10 और दूसरे साल नौ दिन की छुट्टी पर रहे। तीसरे व चौथे साल उन्होंने कोई छुट्टी नहीं ली। नाईक का कहना है कि अखिलेश सरकार में भी वह कानून-व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता की बात कहा करते थे और आज भी कहते हैं कि सुधार की जरूरत है।

बकौल नाईक वे राष्ट्रपति या उप राष्ट्रपति पद के लिए दावेदार नहीं थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व सरकार से उनका बेहतर तालमेल है। विश्वविद्यालयों में हाल में हुई घटनाओं को लेकर वह जरूर चिंतित हैं। उनका कहना है कि इस पर रोक लगनी चाहिए। बतौर राज्यपाल चार वर्ष पूरे होने पर ‘अमर उजाला’ ने नाईक से विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से बातचीत की। प्रस्तुत हैं प्रमुख अंश :-
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सवाल : आपका चार वर्ष का कार्यकाल पूरा होने जा रहा है। अपने कार्यकाल का मूल्यांकन किस तरह करते हैं ?
जवाब : मेरे काम का मूल्यांकन तो लोगों को करना चाहिए। जहां तक मेरा सवाल है तो मैं आत्मपरीक्षण करता रहता हूं। मुझे ऐसा लगता है कि इस साल मैंने जो काम किए वह बीते तीन वर्षों से ज्यादा अच्छा रहा। इस साल कई विशेष बातें हुईं। इसमें सबसे प्रमुख रहा यूपी के  स्थापना दिवस समारोह का आयोजन। इससे यूपी की अस्मिता जागृत हुई है। मैंने पहले अखिलेश यादव को प्रस्ताव दिया था पर उन्होंने स्वीकार नहीं किया। योगी सरकार ने इसे स्वीकार किया।

सवाल : राज्य सरकार के एक वर्ष के कार्यकाल पूरा हो चुका है। सरकार के कामकाज के  बारे में आपकी क्या राय है? 
जवाब : योगी सरकार का एक साल से ज्यादा का समय हुआ है। दो-तीन विषयों पर काफी तेजी से काम हुआ है। कृ षि एवं किसानों के  विकास के साथ-साथ औद्योगिक विकास और शिक्षा व्यवस्था के क्षेत्र में अच्छा काम हुआ है। विश्वविद्यालयों में बीते दो साल से दीक्षांत समारोह वक्त पर हो रहे हैं। 15.60 लाख विद्यार्थियों को उपाधि मिली है। इनमें 7.98 लाख छात्राएं हैं। लड़कों के मुकाबले लड़कियां पढ़ाई में आगे हैं। इसे महिला सशक्तीकरण की दिशा में बड़ा कदम माना जा सकता है। उद्योग-व्यापार बढ़ाने की दृष्टि से इन्वेस्टर्स समिट आयोजित की गई। इसमें हुए 4.28 करोड़ के 1048 एमओयू को धरातल पर उतारने का पहला चरण 29 जुलाई से शुरू हो रहा है जिसमें 60 हजार करोड़ की परियोजनाओं का शिलान्यास होगा। प्रदेश में निवेश के लिहाज से बिजली और कानून-व्यवस्था भी काफी अहम है। इन दोनों मोर्चों पर भी सरकार ने तेजी से काम किया है। माफिया राज पर सरकार ने हमला बोला जिसके अच्छे नतीजे सामने आ रहे हैं। निवेश को लेकर यूपी की छवि बदल रही है।

सवाल : सपा अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव कह रहे हैं कि उनकी सरकार में कानून-व्यवस्था को लेकर आप खूब पत्र लिखते थे? अब जो घटनाएं हो रही हैं उस पर राजभवन चुप्पी साधे हुए है?
जवाब : अखिलेश यादव जो कहते हैं उसमें राजनीतिक रंग नजर आता है। इसका उत्तर नहीं दूंगा। उनकी बात का स्पष्टीकरण दूं यह मेरे लिए ठीक नहीं है। हां इतना जरूर है कि कानून-व्यवस्था सुधर रही है। कानून-व्यवस्था के भी दो पहलू हैं। पहला संगठित अपराध जिससे माफिया जुड़े रहते हैं और दूसरा व्यक्तिगत अपराध जो आपसी विवाद के चलते होते हैं। यह भी सरकार के लिए महत्वपूर्ण है लेकिन माफिया पर जिस तरह से नियंत्रण किया गया, वह काफी महत्वपूर्ण है। अखिलेश सरकार भी मेरी थी और मैं कहता था कि कानून-व्यवस्था सुधारने की आवश्यकता है। आज भी यही कहता हूं कि कानून-व्यवस्था में सुधार की जरूरत है। देख रहा हूं कि सुधारने के प्रयास हो रहे हैं। जहां जरूरत होती है वहां सरकार को इस संबंध में सलाह देता भी हूं।

सवाल : आपको राष्ट्रपति व उपराष्ट्रपति के लिए गंभीर उम्मीदवार माना जा रहा था। ऐसी क्या परिस्थितियां हुईं जो आप दौड़ से बाहर हो गए?
जवाब : ये तो उनसे पूछिए जो मुझे उम्मीदवार मान रहे थे। मैंने इन पदों के लिए कोई दावेदारी नहीं की थी। जो काम कर रहा हूं उसी में खुश और संतुष्ट हूं। जिन लोगों ने मुझे इस पद योग्य समझा उन्हें धन्यवाद देता हूं।

सवाल : सरकार और राजभवन के बीच दूरी पैदा होने की बात चर्चा में है। सीएम के प्रमुख सचिव के खिलाफ सामान्य मेल पर आपने डीओ लेटर लिख दिया? क्या वजह है?
जवाब : मुख्यमंत्री मुझे अभिभावक और मार्गदर्शक मानते हैं। उनसे मेरे काफी अच्छे संबंध हैं। सरकार से भी काफी अच्छा तालमेल है। जहां तक डीओ लेटर लिखने का प्रश्न है तो यह मेरी कार्यपद्धति का हिस्सा है। केवल इसी साल 6,751 लोग मुझसे मिलने आए। कोई समस्या तो कोई सुझाव लेकर आता है और जो पत्र देते हैं उसका निस्तारण करता रहता हूं। कभी राष्ट्रपति तो कभी प्रधानमंत्री को पत्र लिखता रहता हूं। मुख्यमंत्री को ज्यादा लिखता हूं। एक ऐसा पत्र आया था जो मुख्यमंत्री से जुड़ा विषय था। मुख्यमंत्री के साथ उसकी प्रति पत्र लिखने वालों को भी सूचना के लिए भेजता हूं, इसलिए उन्हें भी भेजा। जो शिकायत थी मुख्यमंत्री उसके बारे में विचार कर रहे हैं।

सवाल : उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सुधार की अपनी मुहिम को कितना सफल मानते हैं?
जवाब : काफी सफलता मिली है। दीक्षांत समारोह, शैक्षिक कैलेंडर पटरी पर आने के साथ-साथ नकल पर भी रोक लगाने में सफलता मिली है। विश्वविद्यालयों में लंबे समय से शिक्षकों के पद खाली थे। उन्हें भरने की प्रक्रिया शुरू हुई है। पाठ्यक्रम में संशोधन आदि पर भी काम चल रहा है।

सवाल : गोरखपुर विश्वविद्यालय में भर्तियों और कई विश्वविद्यालयों में उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में गड़बड़ियों की शिकायतें आ रही हैं। कहां कमी रह गई?
जवाब : गोरखपुर विश्वविद्यालय के बारे में कोई शिकायत नहीं मिली है। उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन का मामला भी सिर्फ वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विवि जौनपुर का ही है। मूल्यांकन को लेकर छात्रों की कुछ शिकायतें थीं जिस पर कुलपति को पुनर्मूल्यांकन के आदेश दिए गए हैं। इसे लेकर वहां के एक प्रोफेसर ने मेरे व डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा के प्रति कुछ अपमानजनक वक्तव्य दिया है। कुलपति से रिपोर्ट मंगवाई है। विधिक परीक्षण चल रहा है। अगर यह सही हुआ तो प्रोफेसर के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

सवाल : विश्वविद्यालयों के कैंपस अशांति व विवाद के केंद्र बनते जा रहे हैं। लखनऊ से लेकर इलाहाबाद, एएमयू और बीएचयू तक यही स्थिति है। हाईकोर्ट ने भी इसका संज्ञान लिया है। इस स्थिति में सुधार के लिए क्या प्रयास हो रहे हैं?
जवाब : कैंपस में शिक्षा का माहौल होना चाहिए। यह दुर्भाग्य है कि ऐसे में कुछ छात्र संगठन गलत ढंग से व्यवहार करते हैं। बीएचयू, एएमयू, इलाहाबाद विवि, लखनऊ के भीमराव आंबेडकर विवि या लखनऊ विवि में हुई घटनाएं निश्चित तौर पर चिंता का विषय हैं। इसमें सुधार की आवश्यकता है। लखनऊ विवि की घटना का संज्ञान हाईकोर्ट ने लिया है। मामला जब न्यायालय में हो तो राज्यपाल का वक्तव्य देना उचित नहीं है।
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सवाल:  विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव नहीं हो पा रहे हैं। कई बार कहा भी गया। क्या इस सत्र में चुनाव कराए जाएंगे?
जवाब : कुछ जगहों पर चुनाव हो रहे हैं। ये निर्देश पिछले साल ही दिए जा चुके हैं कि छात्रसंघ चुनाव होने चाहिए। विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में प्रवेश की प्रक्रिया चल रही है। इसके बाद ही छात्रसंघ चुनाव का सवाल आता है।

सवाल : राज्यपाल के तौर पर आपका कार्यकाल एक साल बचा है। अगले एक वर्ष की क्या प्राथमिकताएं होंगी?
जवाब : चार साल में जो काम किया है उसका जब मै सिंहावलोकन करता हूं तो मुझे संतुष्टि होती है। इसी प्रकार काम पांचवें वर्ष में भी करने का संकल्प है मेरा, जिससे यूपी सर्वोत्तम प्रदेश बनाने की स्थिति में पहुंच जाएगा।
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