दांत की बीमारियों में लेजर के इस्तेमाल से मरीजों को फायदा हो रहा है। सर्जरी के दौरान खून न निकलना, दांत के गड्ढों को हटाना, ठंडा और गर्म लगने जैसी बीमारियों से इस तकनीक से निजात दिलाई जा सकती है।
इसके अलावा मुंह के कैंसर के शुरुआती दौर में होने वाली दिक्कतों को भी इससे ठीक किया जा सकता है। केजीएमयू के ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग में यूनीकार्न डेनमार्ट एंड क्रेनियोफेशियल रिसर्च फाउंडेशन के सहयोग से लेटेस्ट एडवांसेस इन क्लीनिकल डेंटिस्ट्री विषय पर आयोजित कान्फ्रेंस में ये जानकारी डॉ. दिव्या मेहरोत्रा ने दी।
दंत संकाय के सीपी गोविला ऑडिटोरियम में आयोजित कान्फ्रेंस में डॉ. दिव्या ने बताया कि मुंह के कैंसर की शुरुआत अवस्था ल्यूकोपीकिया, ओरल बस म्यूकस फाइब्रोसिस, हार्ड टिश्यू को हटाने में लेजर का इस्तेमाल किया जाता है।
डीन डेंटल प्रो. एपी टिक्कू ने बताया कि लेजर के कुछ सेकेंड के इलाज से दांतों में ठंडा व गर्म लगने की दिक्कतों को दूर किया जा सकता है।
उन्होंने देश की बेहतरीन दंत संकायों में से एक माने जाने वाले केजीएमयू में लेजर से इलाज की सुविधा उपलब्ध है। इस मौके पर मरीजों का लेजर से लाइव सर्जरी की गई।
इस मौके पर डॉ. शादाब मोहम्मद, डॉ. अनिल चंद्रा ने भी लेजर से दांत के इलाज के बारे में जानकारी दी। इस मौके पर कुलपति प्रो. रविकांत, डीन प्रो. राज मेहरोत्रा भी मौजूद थे।
टूटे हुए दांत की कमी को इम्पलांट की मदद से दूर किया जा सकता है। इम्प्लांट लगाए जाने के दौरान आसपास के दांतों को कोई नुकसान भी नहीं पहुंचता है।
बीबीडी कॉलेज ऑफ डेंटल साइंसेस में आयोजित इम्प्लांट रिहैबलिटेशन करंट कान्सेप्ट्स विषय पर आयोजित सतत् दंत चिकित्सा कार्यक्रम में ये जानकारी मुंबई से आए प्रास्थोडॉन्टिक्स एंड इम्प्लांटोलॉजिस्ट डॉ. सुजीत बापारडिकर ने दी।
उन्होंने बताया कि दुर्घटना में टूट चुके दांतों की जगह इम्प्लांट का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे मरीज को कोई दिक्कत भी नहीं होती। इस मौके पर डीन डॉ. विवेक गोविला, आयोजन सचिव डॉ. वंदना ए.पंत सहित कॉलेज के छात्र-छात्राएं भी मौजूद थे।