अंसल एपीआई ने सुशांत गोल्फ सिटी में एलडीए में बंधक के तौर पर रखी करीब 311 एकड़ जमीन को बेच दिया। इसमें एलडीए के पूर्व अधिकारियों की साठगांठ सामने आ रही है। अब तक सामने आए तथ्यों के मुताबिक इस बंधक जमीन को फेज-1 की जगह फेज-3 में ट्रांसफर कर दिया गया।
यह उस समय हुआ, जबकि बिल्डर कंपनी ने फेज-3 के लिए जमीन का अधिग्रहण तक नहीं किया था। विधानसभा की याचिका समिति ने इस मामले की जांच शुरू कराई है। विधानसभा की याचिका समिति ने अब एलडीए को इस मामले की गहनता से जांच करने के लिए कहा है।एलडीए को इस मामले में देखना है कि आखिर ऐसा कैसे हो गया?
याचिका समिति की उप समिति के सदस्यों ने अंसल से दस्तावेज लेने के बाद एलडीए से इस पर रिपोर्ट मांगी है। तीन जुलाई को एलडीए इस पूरे मामले पर अपना पक्ष रखेगा। उप समिति के तरफ से मिले निर्देशों के मुताबिक एलडीए को बंधक जमीन को मुक्त करने और वहां मानचित्र स्वीकृत करने के लिए अधिकृत अधिकारियों की भी जानकारी मांगी गई है।
एलडीए और अंसल एपीआई के बीच हाइटेक टाउनशिप के विकास के लिए हुए अनुबंध की शर्तों के मुताबिक कुल विक्रययोग्य क्षेत्रफल का 25 प्रतिशत जमीन एलडीए के पास बंधक रहनी थी। ऐसे में फेज-1 के कुल 3500 एकड़ क्षेत्रफल के ले-आउट को पास कराने के बाद 311 एकड़ जमीन को एलडीए में परफॉर्मेंस गारंटी के रूप में बंधक बनाया।
एलडीए ने क्यों साधी चुप्पी
डेमो
इस बंधक जमीन को फेज-1 से फेज-3 में ट्रांसफर किया गया। उप समिति के सामने यह तथ्य आया है कि फेज-3 में जमीन का अधिग्रहण ही कंपनी ने नहीं किया था। ऐसे में जो जमीन बिल्डर कंपनी के पास ही नहीं थी। उसे बंधक कैसे बना दिया गया? केवल जमीन के अधिग्रहण की अधिसूचना होना ही काफी नहीं था। दूसरे, फेज-1 की बंधक जमीन को फेज-3 में किस आधार पर ट्रांसफर करने पर सहमति बन गई?
इन बिंदुओं पर भी चल रही जांच
- फेज-1 में कितना मानचित्र स्वीकृत, उसके सापेक्ष कितना विकास हुआ?
- एलडीए ने अपने निरीक्षण में क्या रिपोर्ट अब तक दीं? क्या एलडीए ने अपनी जिम्मेदारी निभाई?
बिल्डर कंपनी और एलडीए के अनुबंध के बिंदु-3 के मुताबिक, प्राधिकरण को तय डेडलाइन के मुताबिक विकास कार्य और कामों में गुणवत्ता के लिए निगरानी और निरीक्षण करने थे। इसके लिए कंपनी ने बड़ी रकम एलडीए को निरीक्षण शुल्क के लिए दी।
दस्तावेजों की कर रहे जांच
- फोटो : डेमो
इसके बाद भी एलडीए के अधिकारियों ने गोल्फ सिटी में चल रही खामियों को उजागर करने के लिए काम नहीं किया। आखिर क्यों उन्होंने चुप्पी साध ली। याचिका समिति के सामने मामला आने के बाद अब एलडीए के पूर्व अधिकारियों के कारनामे सामने आने लगे हैं।
विधानसभा की याचिका समिति की उप समिति ने बंधक जमीन को बेचने के अलावा दूसरे बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी है। इन दस्तावेजों की जांच हम कर रहे हैं। याचिका समिति को पूरी सूचना दी जा रही है। बंधक जमीन पर संपत्तियां बेचने की बात बिल्कुल सही है। खुद बिल्डर कंपनी भी इसे स्वीकार कर चुकी है। - नितिन मित्तल, मुख्य नगर नियोजक, एलडीए