मांझे से क्षतिग्रस्त हुए सांस की नली और आहार नाल को जोड़कर डॉक्टरों ने युवती की जान बचा ली। मांझे में फंसने से दोनों नलियां दो जगह से कट कर आपस में उलझ गईं और खून जाने की वजह से सांस नली बंद हो गई थी।
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संयोग से आहार नाल के बगल से गुजर रही दिमाग को खून देने वाली नस (कैरोटेड) बच गई थी, अन्यथा युवती को बचाना नामुमकिन था। करीब घंटेभर चले ऑपरेशन के बाद अब उसकी स्थिति ठीक है। उसे मंगलवार को घर भेजा जाएगा। अभी कुछ दिन तक तरल पदार्थ ही दिया जाएगा।
पहली बार आया ऐसा केस : एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. वेद प्रकाश का कहना है कि मांझे से कटे केस तो कई आए, लेकिन दोनों नलियों के एक साथ दो बार कटने की वजह से यह केस बेहद क्रिटिकल था। मांझे से कटा इतना गंभीर केस पहली बार आया है।
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बेहद गंभीर थी स्थिति
घायल सुरभि व डॉ वेद प्रकाश
- फोटो : amar ujala
बालागंज निवासी सुरभि (22) स्कूटी से 25 दिसंबर की दोपहर करीब तीन बजे बर्लिंगटन जा रही थीं। वह घर से थोड़ी दूर पहुंची थी कि उनका गला मांझे में फंस गया। वह वहीं गिर पड़ीं। उनका गला मांझे में तीन बार लिपटकर जख्मी हो गया था।
परिवारीजन उसे तुरंत सिविल अस्पताल ले गए, जहां से उन्हें ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया गया। चिकित्सकों ने देखा कि सांस नली के साथ ही आहार नली भी कट गई है। दो बार कटने के बाद दोनों नलियां आपस में चिपक गई हैं।
इतना ही नहीं सांस और आहार नाल पूरी तरह से चोक हो गया था। उन्हें रेस्पेरेटरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन में भर्ती किया गया। युवती का इलाज करने वाले एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. वेद प्रकाश ने बताया कि सांस और आहार नाल के आपस में चिपकने और खून जाने से जाम होने की वजह से सुरभि की सांसें अटकने लगी थीं। स्थिति बेहद गंभीर देख तुरंत ब्रोनकोस्पोकी की गई।
यहां पढ़ें, क्या थी चुनौती
डॉक्टर वेद प्रकाश
- फोटो : amar ujala
तीन बार की ब्रोनकोस्कोपी के बाद सांस नली साफ हो सकी। इसके बाद रेस्पेरिटरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन की टीम के साथ ही प्लास्टिक सर्जरी की टीम को भी बुलाया गया। फिर ऑपरेशन करके आहार नली और सांस नली को दो बार जोड़ा गया। इस दौरान सांस लेने के लिए गले के नीचे दूसरी नली लगाई गई। दोनों नली को दोबारा उसके मूल स्थान पर ले जाया जा सका। इस दौरान मरीज को वेंटिलेटर पर ही रखा गया।
डॉ. वेेद प्रकाश ने बताया कि आहार और सांस नली के कट जाने की वजह से उसे ऑक्सीजन देना सबसे बड़ी चुनौती थी। इसके लिए ब्रोनकोस्कोपी करने के बाद उसे अलग से कट लगाकर पाइप लगाई गई, जिसके जरिये उसे वेंटिलेटर से जोड़ दिया गया।
इसके लोगों दोनों नलियों के दो हिस्से में कटे होने की वजह से उन्हें जोड़ना चुनौतीपूर्ण था। फेफड़े भी संक्रमित हो गए थे। इस दौरान निमोनिया होने का था खतरा। ऐसी स्थिति में उसे 10 दिन तक वेंटिलेटर पर रखा गया।
ट्रॉमा सर्जरी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. समीर मिश्रा ने बताया कि मांझे की वजह से आए दिन दुर्घटना हो रही है। इसमें उलझने से लोगों की गर्दन करने के साथ ही हाथ, पांव भी कट रहे हैं।
खास बात यह है कि इसमें उलझने से जिनकी गर्दन कटती नहीं है वे दुर्घटना होने ये घायल हो गए हैं। डॉ. मिश्रा के मुताबिक, पिछले तीन दिन में चार मरीज ऐसे आए हैं, जो मंझो की वजह से गंभीर रूप से दुर्घटनाग्रस्त हुए। हालांकि समय पर ट्रॉमा सेंटर पहुंच जाने की वजह से उनकी जान बचा ली गई।
ये रहे सर्जरी टीम के हिस्सा
रेस्पेरिटरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन के प्रभारी डॉ. वेद प्रकाश के साथ डॉ. अंकित कुमार, डॉ. आहाब, डॉ. सुलक्षणा, डॉ. अभिषेक, डॉ विकास के अलावा प्लास्टिक सर्जरी, एनेस्थीसिया और ईएनटी विभाग की टीम मौजूद थी।