केजीएमयू सहित कई अस्पतालों में ट्रूनेट किट की कमी बनी आफत
राजधानी के अस्पतालों में ट्रूनेट किट की कमी से इमरजेंसी में आने वाले मरीजों का इलाज प्रभावित हो रहा है। आरटीपीसीआर की रिपोर्ट के लिए मरीजों को दूसरे दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है।
ऐसे में होल्डिंग एरिया में मरीज बढ़ने से स्टाफ में संक्रमण का डर बना हुआ है। केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर अत्यंत गंभीर मरीजों को तत्काल ट्रूनेट किट से जांच की जाती है।
जिन मरीजों को तत्काल प्रोसीजर की जरूरत नहीं होती है, उनका आरटीपीसीआर कराया जाता है। ट्रूनेट से जांच के बाद रिपोर्ट चार घंटे में मिल जाती है और आरटीपीसीआर से दूसरे दिन मिलती है।
ऐसे में ट्रॉमा में प्रतिदिन करीब सौ से 125 ट्रूनेट किट की जरूरत पड़ती है। बताया जाता है कि इमरजेंसी में आने वाले मरीज की पहले स्क्रीनिंग की जाती है।
यदि ई-जीन पाया गया तो कोरोना पॉजिटिव कन्फर्म करने के लिए आरडीआरपी टेस्ट करते हैं। दोनों के पॉजिटिव पाए जाने पर मरीज को कोविड वार्ड भेज दिया जाता है।
जिनकी रिपोर्ट निगेटिव होती है, उन्हें संबंधित विभाग के वार्ड में शिफ्ट किया जाता है। ट्रूनेट जांच होते रहने से गंभीर मरीज पॉजिटिव है या नहीं, इसकी जानकारी जल्द मिल जाती है।
इससे होल्डिंग एरिया में काम करने वाला स्टाफ भी सुरक्षित रहता है और मरीज को जल्द कोविड वार्ड में शिफ्ट कर दिया जाता है।
सूत्र बताते हैं कि ट्रूनेट किट की कमी से तीन दिन से ज्यादातर मरीजों की जांच आरटीपीसीआर से कराई जा रही है। ऐसे में रिपोर्ट दूसरे दिन मिल रही है।
रेजिडेंट डॉक्टरों का कहना है कि जांच में देरी होने से मरीज को देर तक होल्डिंग एरिया में रोकना पड़ रहा है। ऐसे में स्टाफ के संक्रमित होने की आशंका बनी रहती है।
सप्ताहभर पहले लिखा था पत्र
सूत्र बताते हैं कि ट्रॉमा सेंटर प्रशासन ने किट की कमी को लेकर सप्ताहभर पहले पत्र लिखा था। आपूर्ति नहीं होने पर संबंधित कंपनी को रिमाइंडर भेजा गया है। इसमें बताया गया है कि किट नहीं होने से इमरजेंसी में मरीजों का इलाज प्रभावित हो सकता है।
अन्य अस्पतालों में भी है कमी
सिविल अस्पताल में भी किट की कमी बताई जा रही है। हालांकि, यहां विकल्प के तौर पर एंटीजन किट से काम चलाया जा रहा है। खास बात यह है कि किट की कमी होने के बावजूद ज्यादातर संस्थानों के अधिकारी खुलकर बोलने को तैयार नहीं है।
इलाज प्रभावित नहीं
केजीएमयू के मीडिया प्रभारी डॉ. सुधीर सिंह ने बताया कि किट की कमी से मरीजों का इलाज प्रभावित नहीं हो रहा है। किट की कमी होने पर आपूर्ति के लिए कंपनी को पत्र भेजा जाता है। आरटीपीसीआर टेस्ट की व्यवस्था है।