नवरात्र में प्रयोग होने वाला कुट्टू का आटा पोषक तत्वों से भरपूर है, लेकिन मिलावट और नमी बढ़ने पर यह विषाक्त हो जाता है। नमी से इसमें फंगस तेजी से बढ़ती है। ऐसे में इसे खाने वाले डायरिया और एलर्जी की चपेट में आ जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि खुले में रखा कुट्टू का आटा 10-15 दिन से ज्यादा समय तक नहीं प्रयोग करना चाहिए। आयुर्वेद के विशेषज्ञ कुट्टू के आटे में मिलावट के कारण उसकी जगह फल खाने की सलाह देते हैं।
नवरात्र में कुट्टू के आटे की खपत बढ़ गई है, लेकिन इसकी शुद्धता पर सवाल उठ रहे हैं। व्यापारी भी दबी जुबान में स्वीकार करते हैं कि कुट्टू का शुद्ध आटा उपलब्ध होना मुश्किल हैं। इसमें सिंघाड़े के आटे समेत कई अन्य चीजों की मिलावट होना आम है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग को खाद्य पदार्थों की शुद्धता की जांच कराने की जिम्मेदारी है, लेकिन वह सिर्फ खानापूर्ति ही करता है।
राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज एवं अस्पताल लखनऊ के प्रधानाचार्य डॉ. पीसी सक्सेना कहते हैं कि कुट्टू की उपलब्धता कम हो गई है। ऐसे में इसके आटे में कई तरह के मिलावट होने की आशंका रहती है। इसलिए बेहतर होगा कि इसका साबुत दाना लेकर घर पर आटा तैयार करें और बंद डिब्बे में रखकर 10 दिन से ज्यादा इसका सेवन न करें। क्योंकि जब आटे में नमी पहुंच जाती है तो इसके पोषक तत्व विषाक्त हो जाते हैं। यही स्थिति बाजरे, चना और अन्य में होता है। अमेरिका की कोलोराडो स्टेट यूनिवर्सिटी एक्सटेंशन के मुताबिक गर्मियों के महीनों में कुट्टू का आटा जल्द खराब हो जाता है और इसके खाने से बीमार होने की आशंका अधिक रहती है।
क्या है कुट्टू
कुट्टू यानी बकवीट का लैटिन नाम फैगोपाइरम एस्कुलेंटम है। इसका गेहूं से कोई संबंध नहीं है। भारत में कुट्टू का पौधा उत्तराखंड, जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश समेत हिमालय के अन्य क्षेत्रों में होता है। वहीं, यह रूस, यूक्रेन और चीन में भारी मात्रा में होता है। भारत में कुट्टू के बीज से बनने वाले आटे का सेवन लोग उपवास में करते हैं।
पोषक तत्वों से भरा कुट्टू है बेहद लाभकारी
विवेकानंद पाली क्लीनिक के विभागाध्यक्ष एवं आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. विजय सेठ का कहना है कि जिन लोगों को गेहूं से एलर्जी होती है, उन्हें कुट्टू के आटे का सेवन करने की सलाह दी जाती है। इसमें आयरन, मैग्नीशियम, फाइबर, विटामिंस और प्रोटीन भरपूर मात्रा में होता है। कुट्टू में सभी जरूरी आठ अमीनो एसिड होते हैं। यह कोलेस्ट्रॉल से मुक्त और कम कैलोरी वाला है। इसलिए मधुमेह के रोगियों के लिए इसे उपयुक्त माना जाता है। यह उच्च रक्तचाप वाले लोगों के लिए भी लाभकारी है। कुट्टू के सेवन से रक्तचाप को सामान्य बनाने में मदद मिलती है और ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा कम होता है। इसमें एंटी ऑक्सीडेंट होता है, जो स्तन कैंसर को रोकता है। इसमें मौजूद विटामिन ए व बी कॉम्प्लेक्स और जिंक बालों के विकास में सहायक है।