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कुशवाहा पर मेहरबानी की तैयारी में सपा

Thu, 10 Oct 2013 08:33 AM IST
विष्णु मोहन/लखनऊ
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कभी निशाने पर रहने वाले पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा पर अब राज्य सरकार काफी मेहरबान हो गई है।
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विजिलेंस में उनके खिलाफ चल रहे मामलों के साथ ही लैकफेड घोटाले में पुलिस को-ऑपरेटिव सेल की जांच भी ठंडे बस्ते में डालने की तैयारी है।

पुलिस को-ऑपरेटिव सेल ने कुशवाहा को सीधे तौर पर भ्रष्टाचार का दोषी माना था। उनके गृह जनपद बांदा में चार करोड़ रुपये की लागत से बनी सड़क में बड़े पैमाने पर हुई कमीशनबाजी में कुशवाहा का नाम सामने आया था।

जांच एजेंसी ने पड़ताल में पाया था कि नियमों को ताक पर रख लैकफेड को कार्यदायी संस्था का दर्जा दिए जाने और फिर उसे विभिन्न विभागों द्वारा कई सौ करोड़ का काम देकर वारे-न्यारे किए जाने के खेल के पीछे भी कुशवाहा थे।
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तत्कालीन पंचायती राज मंत्री कुशवाहा ने ही पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि (बीआरजीएफ) योजना का 143 करोड़ रुपये का काम कराने के लिए लैकफेड को कार्यदायी संस्था नियुक्त किया था।

पुलिस को-ऑपरेटिव सेल कुशवाहा को इस मामले में रिमांड पर लेकर पूछताछ करना चाहती थी, लेकिन ऊपर से इशारा न होने की वजह से यह कवायद रोक दी गई।

विजिलेंस ने लोकायुक्त की सिफारिश पर पूर्व मंत्री के खिलाफ जो खुली जांच की थी, उसमें कुशवाहा को न सिर्फ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने, बल्कि पद का दुरुपयोग कर सरकारी रकम की बंदरबांट करने, जमीन कब्जा करने और फर्जी दस्तावेजों का सहारा लेने का आरोपी पाया था।
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लैकफेड के मुख्य आरोपी संस्था के पूर्व अध्यक्ष सुशील कटियार के पूर्व मंत्री से नजदीकी रिश्ते होने की बात भी सामने आ चुकी है।

ऐसे तमाम आरोपों में घिरे पूर्व मंत्री के खिलाफ चल रहे लगभग सभी मामले फिलहाल ठंडे बस्ते में हैं। गौरतलब है कि राज्य सरकार ने पिछले सप्ताह पूर्व मंत्री की बेटी के प्रत्यावेदन पर उनके खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की तैयारी शुरू कर दी है।

इसके मद्देनजर सरकार ने विजिलेंस अधिकारियों से पूर्व मंत्री की बेटी के प्रत्यावेदन की जांच कर रिपोर्ट देने को निर्देश दिए हुए हैं।
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