प्रयागराज में जिन श्रद्घालुओं ने मौनी अमावस्या पर स्नान कर लिया, वे पांच ट्रेनों से लखनऊ लौटे। हालांकि, लखनऊ आने वाली ट्रेनें ठसाठस भरी हुई थीं। रेलवे स्टेशन तक पहुंचने में यात्रियों के पसीने छूट गए। 12 हजार यात्री ट्रेनों से चारबाग रेलवे स्टेशन पहुंचे। बरेली प्रयागराज एक्सप्रेस(14308), नौचंदी एक्सप्रेस(14242), लखनऊ प्रयाग इंटरसिटी(14210), गंगा गोमती एक्सप्रेस(14216) व त्रिवेणी एक्सप्रेस(15074) से श्रद्घालु लखनऊ पहुंचे।
लखनऊ से प्रयागराज के लिए श्रद्घालुओं ने विमान सेवाओं का भी इस्तेमाल किया। पर, भगदड़ के चलते प्रयागराज बीती 28 जनवरी को इंडिगो की डायरेक्ट फ्लाइट 6ई-7935 से पहुंचे यात्रियों को स्नान के लिए मशक्कत करनी पड़ी। 10742 रुपये का टिकट लेकर पहुंचे आलमबाग के आनंद पाठक ने बताया कि वह अरेल की ओर से घाट तक गए थे, स्नान तो हो गया। लेकिन भगदड़ के बाद हालात बेकाबू थे, ऐसी सूचनाएं लगातार मिलती रहीं।
त्रिवेणी कैंसिल, फाफामऊ में रोकी गईं ट्रेनें
लखनऊ से प्रयागराज जाने वाली गाड़ी संख्या 15074 त्रिवेणी एक्सप्रेस बुधवार को निरस्त कर दी गई। वहीं ऐहतियात के तौर पर ट्रेनों से उतरे यात्रियों को प्रयाग स्टेशन पर ही रोका गया। लंबी दूरी की ट्रेनों को फाफामऊ में ही स्टॉपेज दिया गया। उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल के सीनियर डीसीएम कुलदीप तिवारी ने बताया कि भगदड़ के बाद ऐहतियात के तौर पर प्रयाग के रेलवे स्टेशनों पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई। प्रयाग स्टेशन के होल्डिंग एरिया में यात्रियों को रोका गया। लंबी दूरी की ट्रेनों को फाफामऊ में स्टॉपेज देकर वहीं से रवाना किया गया।
लुधियाना से चारबाग रेलवे स्टेशन पहुंची जासो देवी ने बताया कि महाकुंभ जा रहे थे, लेकिन त्रिवेणी एक्सप्रेस कैंसिल कर दी गई। फिलहाल इंतजार करेंगे। हालात सामान्य होने पर प्रयागराज जाएंगे। ऐसे ही अमृतसर से आए संजय कुमार ने बताया कि परिवार के साथ पहली बार महाकुंभ स्नान करने जा रहा था। लेकिन ट्रेन रद्द होने से अगले दिन जाऊंगा। शाहजहांपुर के अभिलाष भी लखनऊ में फंसे रहे।
जा रहा भा संगम घाट, किस्मत से बचा
प्रयागराज से त्रिवेणी एक्सप्रेस बुधवार दोपहर करीब तीन बजे चारबाग स्टेशन पहुंची। बाराबंकी के प्रकाश कश्यप व मोनू यादव ने बताया कि वे अरेल की ओर थे, जहां स्नान हो गया। संगम की ओर भगदड़ मचने से हालात खराब थे। वहीं फतेहगंज निवासी प्रकाश ने कहाकि वह भाग्यशाली निकले, जो मौनी अमावस्या पर स्नान कर पाए। पहले वह संगम घाट जाना चाह रहे थे, पर किस्मत से बच गए। लखनऊ निवासी धर्मवती पाठक, ललिता चौहान ने भी अरेल की ओर जाकर घाट पर स्नान किया। चूंकि त्रिवेणी उस ओर से आती है, इसलिए आसानी से लखनऊ पहुंच सकीं, अन्यथा फंस जाती।