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मोदी से पहले जयापुर पर थी 'मुगलों' की नजर!

Mon, 10 Nov 2014 10:57 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
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450 साल बाद 3,500 गांव वालों के लिए ये दूसरा खुशी का मौका था, जब ये ऐलान हुआ कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत उनके गांव जयापुर को गोद लेकर सूरत बदल देंगे।
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जयापुर प्रधानमंत्री मोदी के निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी में आता है। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, इससे पहले इस गांव की किस्मत मुगल काल में चमकी थी, जिसका जिक्र इतिहास के पन्नों में दर्ज है।

दूसरी बार ये गांव मोदी के वाराणसी दौरे के एक दिन पहले सुर्खियों में आया जब उन्होंने इस गांव को गोद लेने की औपचारिक घोषणा की।

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में पॉलिटिकल साइंस के प्रोफेसर केके मिश्र बताते हैं, 'मुगल शासक औरंगजेब पर जब मंदिर तुड़वाने की सनक सवार थी उस वक्त उसके सैनिकों का ध्यान गांव के एक पुराने हनुमान मंदिर पर गया।'
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बकौल मिश्र, ये मंदिर अनोखा था क्योंकि इसमें भगवान हनुमान काले रंग के थे। इसी वजह से ये मंदिर आज भी ‘काले हनुमान जी का मंदिर’ के नाम से जाना जाता है।

प्रोफेसर मिश्र बताते हैं, हालांकि गांववाले हार कहां मानने वाले थे उन्होंने मुगल सिपाहियों से बहादुरी से जंग की और उन्होंने भागने पर मजबूर कर दिया।
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राजनीतिक नजरिये से भी खास है ये गांव

2003 में गांव के आर्मी अफसर अजय कुमार सिंह जम्मू कश्मीर में आतंकवादियों से लड़ते वक्त शहीद हो गए थे। ऐतिहासिक महत्व के अलावा गांव का राजनीतिक महत्व भी है।

इस जगह पर पटेल बिरादरी का वर्चस्व है। शिवपुरी ब्लॉक में ‌स्थित ये जगह स्व. सोनेलाल पटेल (अपना दल के संस्थापक जिन्होंने लोकसभा चुनाव में बीजेपी से हाथ मिला लिया था, का कार्यक्षेत्र थी।

लोगों का मानना है कि जयापुर गांव चार ऐसे बड़े गांवों से घिरा हुआ है, जहां पटेलों का वर्चस्व है इसलिए जयापुर में होने वाले विकास का असर इन गांवों में ‌भी दिखाई देगा।

अपना दल में सोनेलाल पटेल की बेटी और बीवी के बीच विवाद गरमाया है। इससे पहले कि मेन वोटर्स ही भटक जाएं अपना दल को अपने रणनीति के बारे में एक बार फिर से सोचना होगा।

गांव के लोग महाराष्ट्र, गुजरात और कर्नाटक में मजदूरी कर रहे हैं जबकि यहां की गन्ने की फसल जयापुरिया गन्ने के नाम से जानी जाती है।

बाकी जगहों पर ये मौसमी फसल है जबकि यहां ये फसल पूरे साल उगाई जाती है। गांव के लोग वाराणसी के जूस बेचने वालों को ही नहीं बल्कि आसपास के जिलों में भी गन्ने का जूस सप्लाई करते हैं।
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