जिलों में तीन और मंडलों में सात साल से जमे समूह ‘क’ और ‘ख’ के अफसर-कर्मी हटाए जाएंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कैबिनेट ने मंगलवार को वार्षिक स्थानांतरण नीति 2017-18 को मंजूरी दे दी।
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जिलों व मंडलों में सेवा की गणना सेवाकाल के दौरान वहां कुल तैनाती की अवधि जोड़कर की जाएगी। मसलन जिले में अगर एक ही तैनाती में तीन साल या फिर कई तैनाती में तीन साल पूरा कर लिया है तो उन्हें हटाया जाएगा।
समूह ‘क’ के स्थानांतरण शासन स्तर से होंगे, जबकि समूह ‘ख’ व अन्य वर्ग के स्थानांतरण विभागाध्यक्ष करेंगे। जनहित व प्रशासनिक दृष्टि से मुख्यमंत्री कभी भी किसी भी कर्मचारी का ट्रांसफर कर सकेंगे। दिव्यांगों को पहले की तरह नई सरकार ने भी तबादला नीति से मुक्त रखा है। तबादले 30 जून तक किए जा सकेंगे।
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पूर्ववर्ती अखिलेश सरकार ने जिलों में छह व मंडलों में 10 साल तक तैनात अधिकारियों को हटाने की व्यवस्था अपनी नीति में की थी। योगी सरकार की पांचवीं कैबिनेट की बैठक में सपा राज की तबादला नीति में बड़ा बदलाव किया गया है।
जानिए कौन कर सकेगा तबादले
डेमो पिक
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संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि स्थानांतरण की सीमा विभागों के सभी अधिकारियों व कर्मचारियों की संख्या के 20 फीसदी तक सीमित रखी जाएगी। जबकि सपा राज में यह सीमा 10 फीसदी थी। तबादला नीति में संदिग्ध निष्ठा वाले कर्मचारियों की तैनाती किसी भी दशा में संवेदनशील पदों पर नहीं किए जाने का प्रावधान किया गया है।
तीन साल से एक ही कुर्सी पर तैनात कर्मी भी हटेंगे
समूह ‘ग’ के जो कर्मचारी तीन साल से एक ही कुर्सी पर तैनात हैं, उनकी जगह बदलने को भी मंजूरी दी गई है। स्थानांतरण की कट ऑफ डेट 31 मार्च तय की गई है। विभागाध्यक्ष, मंडल व जिलों के सभी ट्रांसफर 30 जून तक पूरी कर लेने को कहा गया है।
विभागीय आवश्यकता के मद्देनजर विभागीय मंत्री स्थानांतरण नीति से हटकर भी तबादले कर सकेंगे। हालांकि इसके लिए उन्हें मुख्यमंत्री की इजाजत लेनी होगी।
समूह ‘क’ के तबादले सीएम की अनुमति से, समूह ‘ख’ के कार्मिकों का विभागीय मंत्री और समूह ‘ग’ व ‘घ’ के कार्मिकों के स्थानांतरण के लिए निर्धारित स्तर से एक स्तर उच्च अधिकारी का अनुमोदन प्राप्त कर किया जा सकेगा।
इन्हें मिलेगी राहत...
ट्रांसफर
- फोटो : demo pic
मानसिक रूप से अस्वस्थ बच्चों के माता-पिता की तैनाती में विशेष ध्यान देना होगा। ऐसे कर्मियों का स्थानांतरण अधिकृत सरकारी चिकित्सक के प्रमाणपत्र के आधार पर विकल्प लेकर ऐसे स्थान पर की जा सकेगी, जहां इलाज की समुचित सुविधा उपलब्ध हो।
दो साल में रिटायर होने वाले वाले समूह ‘ग’ के कर्मियों को गृह जिले में और समूह ‘क’ व ‘ख’ के अधिकारियों को गृह जिला छोड़कर मनचाहे जिले में तैनाती दी जा सकेगी।
सूत्रों के मुताबिक अगर पति-पत्नी दोनों सरकारी सेवा में हों तो जहां तक संभव हो उन्हें एक ही जिले, नगर व स्थान पर तैनाती दी जाएगी
कर्मचारी नेताओं को ट्रांसफर से छूट, सिफारिश पर सजा
सीएम योगी आदित्यनाथ
सरकारी सेवकों के मान्यताप्राप्त सेवा संघों के पदाधिकारियों में अध्यक्ष व सचिव का ट्रांसफर संगठन में पद प्राप्त करने के दो साल तक नहीं किया जाएगा।
यह सुविधा जिला संघों के अध्यक्ष व सचिव को भी मिलेगी। तबादला अगर बेहद जरूरी हो तो इसके लिए अधिकृत अधिकारी से एक स्तर उच्च अधिकारी की रजामंदी लेनी होगी। जिला शाखाओं के पदाधिकारियों के तबादले पर डीएम की इजाजत लेनी होगी।
ट्रांसफर रोकने की सिफारिश की तो निलंबन
कैबिनेट ने साफ कर दिया है कि ट्रांसफर रोकने के आवेदनों पर विचार नहीं किया जाए।
यदि कोई ऐसे आदेशों के खिलाफ दबाव डलवाने का प्रयास करता है तो निलंबन की कार्रवाई की जा सकेगी। तय समय में कार्यभार न छोड़ने पर संबंधित कर्मी का वेतन रोक दिया जाएगा और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। यदि अधिकारी स्थानांतरित अधिकारी को कार्यमुक्त नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई होगी।