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पैसेंजर ट्रेन में विस्फोट: पीएम की रैली में बम रखना चाहते थे आतंकी, रासायनिक हथियार व सायनाइड भी पाना चाहते थे

Wed, 01 Mar 2023 10:17 AM IST
ishwar ashish नीरज श्रीवास्तव, अमर उजाला, लखनऊ

सार

भोपाल-उज्जैन पैसेंजर ट्रेन में विस्फोट करने वाले आतंकी गैर सुन्नी को भी काफिर मानते थे। वो ज्यादा से ज्यादा लोगों की हत्या करने के लिए रासायनिक हथियार और सायनाइड भी प्राप्त करना चाहते थे।
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- फोटो : प्रयागराज
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विस्तार
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देश के खिलाफ युद्ध करने समेत तमाम मामलों में कोर्ट से मृत्युदंड पाए आरोपी फैसल, गौस मोहम्मद खान, मोहम्मद अजहर, आतिफ मुजफ्फर, मोहम्मद दानिश, सैयद मीर हुसैन और आसिफ इकबाल उर्फ रॉकी गैर सुन्नी को भी काफिर मानते थे। ये सारे आईएसआईएस की विचारधारा को स्थापित करने के लिए रासायनिक हथियार और सायनाइड प्राप्त करना चाहते थे। ये लोग काफिरों के खाने में सायनाइड मिलाकर अधिक से अधिक लोगों को मारना चाहते थे। अपनी इसी विचारधारा को स्थापित करने के लिए ये आतंकियों ने प्रधानमंत्री की रैली में बम विस्फोट करना चाहते थे।

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एनआईए के विशेष न्यायाधीश विवेकानंद शरण त्रिपाठी ने इन दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। उन्होंने कहा कि दोषी सीरिया और इराक जाकर उन देशों के खिलाफ युद्ध करना चाहते थे। इसलिए ये केरल, राजस्थान और कश्मीर के रास्ते बांग्लादेश होते हुए भारत से बाहर निकलना चाहते थे। पर, सफल नहीं हो सके।

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कोर्ट ने कहा कि दोषियों ने वर्ष 2016 में लखनऊ में आयोजित दशहरा रैली के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम में बम विस्फोट करना चाहते थे लेकिन सख्त सुरक्षा व्यवस्था के कारण बम नहीं रख पाए। कोर्ट ने कहा की यह देश पहले भी आतंकवाद के करण पीड़ित रहा है और आतंकवादी हमलों में देश दो पूर्व प्रधानमंत्रियों इंदिरा गांधी और राजीव गांधी को खो भी चुका है।

इससे पहले कोर्ट में सरकारी वकीलों ने दोषियों के लिए मृत्युदंड की मांग की। कहा कि दोषियों को देश के खिलाफ युद्ध करने का दोषी पाया गया है। इन्हें अगर फांसी नहीं दी गई तो देश में आतंकवाद बढ़ेगा। वहीं, इस्लामी आतंकी संगठन जेहाद के नाम पर आईएसआईएस को जीत दिलाने और खलीफा का शासन स्थापित करने के लिए लगातार आतंकी हमले करते रहेंगे।

उन्होंने बताया कि आतिफ ने घोषणा की थी कि जब तक वे देश के बाहर नहीं जा पा रहे हैं, तब तक हिंदुस्तान में रहकर तैयारी करेंगे। इसी क्रम में दोषी हमला करने की तैयारी किया करते थे। 24 अक्तूबर 2016 को सैफुल्लाह, आतिफ और फैसल ने कानपुर के चाकरी में सेवानिवृत्त शिक्षक रमेश शुक्ला की गोली कराकर हत्या कर दी। इसके बाद 7 मार्च 2017 को मध्यप्रदेश के शाजापुर स्टेशन के निकट भोपाल-उज्जैन पैसेंजर ट्रेन के जनरल बोगी में बम विस्फोट किया था।

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भारत सरकार के खिलाफ युद्ध में भाग लिया

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि मोहम्मद आतिफ भोपाल-उज्जैन पैसेंजर ट्रेन बम ब्लास्ट, प्रधानमंत्री की रैली में बम रखने की कोशिश या कानपुर के रमेश शुक्ला की हत्या में शामिल नहीं था। लिहाजा उसे फांसी देना उचित नहीं है लेकिन वह आतिफ मुजफ्फर का सहयोगी है और उसने हथियार व विस्फोटक इकट्ठा किए। इस तरह उसने भारत सरकार के खिलाफ युद्ध में भाग लिया।

कोर्ट ने यह भी कहा कि दोषी अपनी कट्टर विचारधारा के लिए इतने समर्पित और मौत से बेखौफ हो चुके थे कि वह आत्मघाती हमलावर के रूप में कहीं भी हमला करने को तैयार थे। जब इन सबके सामने सुरक्षाबल आते हैं तो इन्हें मौत के भय की जगह जन्नत की खुशबू आने लगती है।

कोर्ट ने कहा कि इस देश में लोकतंत्र के प्रतीक के तौर पर जो रैलियां की जाती है, उनमें राजनेता भयमुक्त होकर जनता को संबोधित कर सकें और जनता भी भयमुक्त होकर शामिल हो सके, हर नागरिक भयमुक्त होकर सार्वजनिक परिवहन के साधनों जैसे ट्रेन इत्यादि में सफर कर सके देश के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप को कोई नुकसान न पहुंचा सके। इसके लिए दोषियों को मृत्युदंड से दंडित किया जाए।
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