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पीएफआई ने लोगों को भड़काकर करवाया था बवाल, पदाधिकारियों के पास मिले थे रामजन्मभूमि सहित ये नक्शे

Tue, 24 Dec 2019 05:01 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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लखनऊ में हुई हिंसा की एक तस्वीर - फोटो : amar ujala
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नागरिकता संशोधन कानून को लेकर हिंसा की साजिश रचने वाले पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के गिरफ्तार पदाधिकारियों के पास से रामजन्मभूमि,  बाबरी मस्जिद और मुजफ्फरनगर दंगों से जुड़े साहित्य मिले हैं। आतंकवाद पर लिखी गई किताबों के साथ कई अन्य साहित्य भी मिले हैं। हजरतगंज कोतवाली के इंस्पेक्टर धीरेंद्र कुमार कुशवाहा ने बताया कि जब्त साहित्य धर्म विशेष के लोगों का माइंडवाश करने के लिए लिखा गया था।

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लखनऊ में युवाओं को भड़काकर कराई थी हिंसा
एसएसपी कलानिधि नैथानी ने बताया कि लखनऊ में बृहस्पतिवार को हुई हिंसा तीन स्तर पर हुई थी। पहले स्तर पर पीएफआई ने तमाम संगठनों को एकत्र किया और दूसरे चरण में रिहाई मंच ने गली-मुहल्लों में जाकर लोगों को नागरिकता संशोधन कानून के बारे में गलत जानकारी दी। तीसरे स्तर पर वे युवा हैं जिन्हें विभिन्न संगठनों ने एकत्र कर गलत जानकारी देकर उकसाया। इन्हीं युवाओं ने पत्थर, असलहे और पेट्रोल बम लेकर पुलिस पर हमला बोल दिया।

विवादित बैनर-पोस्टर लगाने पर दर्ज हैं 10 एफआईआर
पीएफआई पर विवादित बैनर-पोस्टर लगाने के आरोप में विभिन्न जिलों में 10 एफआईआर दर्ज हैं। सीओ हजरतगंज अभय कुमार मिश्रा ने बताया कि बाराबंकी, मेरठ, मुजफ्फरनगर, बिजनौर और सीतापुर में पीएफआई ने विवादित पोस्टर-बैनर लगाए थे। वर्ष 2010 से पीएफआई के खिलाफ केस दर्ज होना शुरू हुआ था। इस वर्ष पीएफआई पर मेरठ और बिजनौर में चार मामले दर्ज किए गए हैं।

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क्या है पीएफआई

पीएफआई की शुरुआत केरल से वर्ष 2006 में हुई थी। संगठन का नारा ‘नया कारवां, नया हिंदुस्तान’ है। संगठन ने कर्नाटक फोरम फॉर डिगनिटी ऑफ कर्नाटक, मनिथा नीति पसराई, गोवा सिटीजन फोरम, राजस्थान कम्युनिटी सोशल एंड एजुकेशनल सोसायटी, वेस्ट बंगाल नागरिक अधिकार सुरक्षा समिति, मणिपुर लिलांग सोशल फोरम और आंध्र प्रदेश एसोसिएशन ऑफ सोशल जस्टिस जैसे कई संगठनों को मिलाकर पूरे देश में गतिविधियां शुरू कर दीं। पीएफआई मुस्लिम आरक्षण, मुसलमानों के पर्सनल लॉ कोर्ट, मुस्लिम और जनजातियों के क्षेत्र में काम करने के अलावा वंचित मुस्लिम छात्रों को स्कॉलरशिप भी देता है।

शामली में भी एडहॉक कमेटी सदस्य समेत कई की हुई थी गिरफ्तारी
एसएसपी ने बताया कि शामली में नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में हिंसा के आरोप में पीएफआई की एडहॉक कमेटी सदस्य मौलाना शादाब और डॉ. नावेद के अलावा 11 अन्य लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।
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खुर्रमनगर में पांच महीने पहले लगाए थे पोस्टर

पीएफआई ने पांच महीने पहले राजधानी के खुर्रमनगर की शादाब कॉलोनी, पंतनगर समेत कई इलाकों में विवादित पोस्टर लगाए थे। रातों-रात लगाए गए इन पोस्टरों से इलाके में दहशत का माहौल था। हालांकि पीएफआई के नार्थ जोन सेक्रेटरी अनीस अंसारी ने पोस्टर में कुछ भी विवादित होने से इनकार किया था। उनका कहना था कि पोस्टर में हिंदू, उर्दू और अंग्रेजी में ‘बेखौफ जियो बाइज्जत जियो’ लिखा था।
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