उनकी निगरानी भी होती थी। पर, सबूत न होने से अंग्रेज कुछ कर नहीं पा रहे थे। एक दिन रफी अहमद किदवई ने जगन प्रसाद रावत को मुंबई जाने का रेल टिकट देते हुए मोटवाणी के पास भेजा। एक चिट्ठी भी भेजी, जिसमें लिखा था,‘अमुक जरूरी दवा फौरन भिजवा दो।’
मोटवाणी को पत्र मिला तो उन्होंने रफी साहब को लताड़ लगाते हुए पत्र लिख दिया, ‘मुझे जो करना है मैं स्वयं करूंगा। आपकी सलाह से नहीं। काम हो जाने पर बता दूंगा। कुछ दिन बाद मोटवाणी ने मुंबई में गुप्त ट्रांसमीटर लगवा दिया।
समाजवादी अच्युत पटवर्धन और उनकी सहयोगिनी फिल्म अभिनेत्री अरुणा बनर्जी (अरुणा आसफ अली) को जिम्मेदारी सौंपकर शास्त्री व किदवई को उसका नंबर भिजवा दिया, जिस पर संदेश प्रसारित होने लगे।’