लखनऊ। गोमतीनगर स्थित केंद्रीय संस्कृत विवि में चल रही दस दिवसीय खादी प्रदर्शनी में मिट्टी के सजावटी सामान व अन्य उत्पाद बेचने वाले कुम्हारों को भी लाभ मिल रहा है। उनका कहना है कि यहां से उन्हें तीन गुना तक आमदनी हो रही है। नौवें दिन शनिवार को भी प्रदर्शनी में खूब चहल-पहल रही। खादी के कपड़े व अन्य स्वदेशी उत्पादों के साथ लोगों ने मिट्टी के बर्तन व अन्य सजावटी सामान भी खूब खरीदे।
बाराबंकी से आए कुम्हार प्रेमचंद ने बताया कि वह मूलरूप से हसनपुर टांडा के रहने वाले हैं, वहीं से काम करते हैं। एक दुकान बंगला बाजार में भी है। कहा कि प्रदर्शनी में उन्हें तीन गुना तक अधिक आमदनी हुई है। दुकान पर जितने उत्पादों से उन्हें तीन से चार हजार रुपये की आमदनी होती थी, यहां पर उसी से 12-14 हजार रुपये कमा रहे हैं। बताया कि माटी कला बोर्ड से हम कुम्हारों को बिजली चालित चाक के साथ मिट्टी छानने वाली मशीन भी मिली है जिससे हमारा काम आसान हो गया हैै। प्रदर्शनी में फूलदान, गमले, अचारदानी, तुलसी पौध, बोनसाई गमले, छोटे खिलौने, हाथी घोड़ा की आकृतियां खूब बिक रही हैैं।
खादी महोत्सव।
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