केजीएमयू में क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग ने 9वां स्थापना दिवस समारोह मनाया गया।
लखनऊ। केजीएमयू के क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग (सीसीएम) के आईसीयू में पिछले एक साल में 1078 मरीज आईसीयू-वेंटिलेटर पर भर्ती किए गए। प्रीसिजन मेडिसिन यूनिट (पीएमयू) से गंभीर मरीजों की जान बचाने में कामयाबी मिल रही है। पिछले साल आईसीयू में मरीजों की मृत्युदर करीब 26 प्रतिशत थी। इसमें करीब आठ प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। मौजूदा समय में मृत्युदर 18 फीसदी बची है। देश में आईसीयू-वेंटिलेटर पर मृत्युदर 23 प्रतिशत है। यह जानकारी केजीएमयू क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. अविनाश अग्रवाल ने दी। शनिवार को केजीएमयू में क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग ने 9वां स्थापना दिवस समारोह मनाया गया।
डॉ. शांतनु प्रकाश ने कहा कि प्रिसिजन मेडिसिन यूनिट के कई फायदे हैं, जिनमें व्यक्तिगत इलाज की योजनाएं शामिल हैं। जो आनुवंशिकी, जीवनशैली और पर्यावरण के आधार पर तय की जाती हैं। इससे दवाओं के बेहतर परिणाम, कम दुष्प्रभाव और स्वास्थ्य देखभाल की लागत में कमी आती है।
कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद ने कहा कि प्रिसिजन मेडिसिन यूनिट से प्रत्येक मरीज की विशिष्ट आनुवंशिक प्रोफाइल के आधार पर इलाज की योजनाएं बनाई जाती हैं, जिससे इलाज अधिक प्रभावी होता है। इससे मरीज को सबसे प्रभावी दवा मिलती हैं। प्रतिकूल दवा प्रतिक्रियाओं का जोखिम कम होता है। प्रिसिजन मेडिसिन को सिर्फ लखनऊ तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। हमें नए मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों को व्यवस्थित रूप से प्रशिक्षित और मार्गदर्शन देना चाहिए। कार्यक्रम में डॉ. सौमित्र मिश्रा, डॉ. सुलेखा सक्सेना, डॉ. सुहैल एस सिद्दीकी, डॉ. सैयद नबील मुजफ्फर, डॉ. अर्मिन अहमद, डॉ. वीआर श्रीवत्स, डॉ. त्रिमिर्तुलु, चेन्नई के श्री रामचंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ हायर एजुकेशन एंड रिसर्च के डॉ. राम ई राजगोपालन, मणिपाल हॉस्पिटल, बेंगलुरु के डॉ. प्रदीप रंगप्पा व अन्य सभी डॉक्टर, रेजिडेंट्स, नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।