लखनऊ। केजीएमयू में कुलपति और कुलसचिव के बीच चल रहा विवाद अब कार्यपरिषद की बैठक तक पहुंच गया है। बैठक की प्रक्रिया को लेकर कुलसचिव अर्चना गहरवार ने सवाल उठाते हुए इसे स्थगित करने की मांग की। जवाब में कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद ने बैठक को जरूरी बताते हुए कुलसचिव को इसमें उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के लिए कहा। हालांकि, बुधवार को हुई बैठक में कुलसचिव मौजूद नहीं रहीं। बैठक में 320 चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति पर निर्णय लिया गया।
कुलसचिव ने छह बिंदुओं में बैठक की प्रक्रिया नियमों के अनुसार कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि पदेन सदस्य सचिव के रूप में उनकी भूमिका सिर्फ बैठक में शामिल होने और हस्ताक्षर करने तक सीमित नहीं है। एजेंडा, प्रस्ताव और संबंधित दस्तावेज समय से उपलब्ध कराए जाने चाहिए।
वहीं कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय के महत्वपूर्ण मामलों के लिए कार्यपरिषद की बैठक जरूरी थी। 18 सितंबर को विशेष बैठक बुलाने के निर्देश के बावजूद बैठक नहीं बुलाई गई, इसलिए 23 सितंबर की बैठक का नोटिस जारी किया गया। दोनों के पत्र सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला चर्चा में है।