ढाई करोड़ रुपये का दवा घोटाला सामने आने के बाद केजीएमयू प्रशासन हरकत में आ गया है। अब संस्थान के उन सभी सात विभागों का विस्तृत ऑडिट कराया जाएगा जहां कैंसर मरीजों का इलाज और कीमोथेरेपी की सुविधा है। प्रशासन ने निर्णय लिया है कि 5000 रुपये से अधिक कीमत की सभी दवाओं का बिल, वाउचर और वितरण रिकॉर्ड खंगाला जाएगा।
पिछले पांच महीनों में सरकारी योजनाओं के तहत इलाज पाने वाले मरीजों का पूरा ब्योरा भी जांच के दायरे में रहेगा। इन विभागों में यूरोलॉजी, रेडियोथेरेपी, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी, मेडिकल ऑन्कोलॉजी, स्त्री एवं प्रसूति रोग, गायनी ऑन्कोलॉजी और इंडोक्राइन सर्जरी शामिल हैं।
प्रवक्ता डॉ. केके सिंह के अनुसार, पांच सदस्यीय जांच समिति पूरे मामले की जांच करेगी। महंगी कीमोथेरेपी और इम्यूनोथेरेपी मरीजों के रिकॉर्ड की भी अलग से जांच होगी। यूरोलॉजी विभाग के तीन कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया गया है और एजेंसी से वसूली की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।