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ट्रामा सेंटर में लगी आग के पीछे साजिश का दावा करने वाले प्रोफेसर से मांगे गए सुबूत

Mon, 21 Aug 2017 02:29 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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फाइल फोटो - फोटो : amar ujala
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एक न्यूज चैनल के खुफिया कैमरे के सामने केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर में लगी आग के पीछे साजिश और दवाओं की खरीद में कमीशनबाजी का आरोप लगाने वाले फार्माकोलॉजी विभाग के प्रोफेसर को कारण बताओ नोटिस भेजा गया है। 
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उनसे भ्रष्टाचार के आरोपों के सुबूत भी मांगे गए हैं। वहीं अस्पतालों में भ्रष्टाचार का खुलासा करने वाले स्वास्थ्य विभाग के अपर निदेशक डॉ. ओपी शाही को शासन ने निलंबित कर दिया।

केजीएमयू में भ्रष्टाचार का खुलासा करना फार्मोकोलॉजी विभाग के प्रो. संजय खत्री पर भारी पड़ गया। केजीएमयू प्रशासन ने उनको नोटिस देकर 48 घंटे के अंदर जवाब मांगा है। उनसे कहा गया है कि उन्होंने खुफिया कैमरे के सामने जो बाते कहीं हैं, उनका सुबूत भी दें। 
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गौरतलब है कि केजीएमयू प्रशासन में इस स्टिंग ऑपरेशन के बाद से हड़कंप मचा है। प्रो. संजय खत्री ने केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर में अग्निकांड से लेकर मरीजों को कैंसर की दवाएं मुहैया कराने में भारी गड़बड़ घोटाले का खुलासा किया था। 
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कैंसर की दवाओं में हो रहा भारी खेल

फाइल फोटो - फोटो : amar ujala
उनका कहना था कि ट्रॉमा सेंटर में स्टोर में आग दवाओं और एयरकंडीशनर की खरीद में गड़बड़ियों का सुबूत मिटाने के लिए लगाई गई थी। कैंसर की दवाओं में भारी खेल हो रहा है। मरीजों की दवाओं से अधिकारी कमीशन खा रहे हैं। 

उन्होंने कहा था कि केजीएमयू में दवाओं की खरीद में बड़ा घोटाला किया जाता है। यहां जो दवाएं खरीदी जाती हैं, वे खास मेडिकल स्टोर से खरीदी जाती हैं। जिसके बदले अधिकारियों को मोटा कमीशन दिया जाता है। यही नहीं उन्होंने दावा किया था कि दवाओं की खरीद सिर्फ कागजों में होती है। 

असल में ये दवाएं अस्पताल आती नहीं हैं, जिससे हर महीने करोड़ों का घोटाला हो रहा है। यही नहीं गरीब मरीजों को दवा बाहर से खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है। मरीजों को जानबूझकर महंगी एंटीबायटिक खाने के लिए लिखी जाती हैं, जिससे डॉक्टरों को मोटा कमीशन मिल सके। 

ट्रॉमा सेंटर में 15 जुलाई को लगी आग को भी उन्होंने जानबूझकर लगाई गई बताया है ताकि एसी प्लांट में हुए एक बड़े घोटाले का सबूत मिटाया जा सके। खुफिया कैमरे के सामने कई अधिकारियों के इस घोटाले में शािमल होने का आरोप लगाया है। 

प्रोफेसर का खुफिया कैमरे के सामने कहना था कि ट्रॉमा सेंटर में एसी प्लांट लगाने के लिए डेढ़ करोड़ रुपये का काम ढाई करोड़ में हुआ है। चहेतों को फायदा पहुंचाने के लिए ऐसा किया गया है।

उधर खुफिया कैमरे के सामने स्वास्थ्य विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार का खुलास करने वाले अपर निदेशक डॉ. ओपी शाही को भी शासन ने निलंबित कर दिया है। वह मिर्जापुर में तैनात हैं। स्टिंग ऑपरेशन में फंसे डॉ. शाही ने प्रांतीय चिकित्सा सेवा संवर्ग में प्राइवेट प्रैक्टिस को बड़ा भ्रष्टाचार बताया था। 

उन्होंने सीएमओ व सीएमएस की पोस्टिंग के लिए लाखों रुपये रिश्वत लेने का भी खुलासा किया था। दवा खरीद में कमीशनबाजी का भी उन्होंने आरोप लगाया था। रविवार को प्रमुख सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य प्रशांत त्रिवेदी ने उन्हें निलंबित कर दिया।


भ्रष्टाचारियों को बख्शा नहीं जाएगा
चिकित्सा शिक्षा विभाग में किसी भी तरह का भ्रष्टाचार करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। हमारी सरकार जीरो टॉलरेंस पर कार्य कर रही है। स्टिंग ऑपरेशन में लगाए गए आरोपों की जांच की जा रही है।
आशुतोष टंडन,
चिकित्सा शिक्षा मंत्री 
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