केजीएमयू में वर्ष 2013 में पैथालॉजी जांच किट और उपकरण खरीद में हुई गड़बड़ी पर सीएम को भी गलत जानकारी दे दी गई।
पैथालॉजी के लिए करीब 70 लाख रुपये की जांच किट की खरीदारी पर कार्यपरिषद ने आपत्ति जताई थी और कंपनी से खरीदारी पर रोक लगा दी थी। विधानसभा में मामला उठने के बाद बसपा नेता के सवाल पर सीएम ने केजीएमयू से जवाब तलब किया था।
जिसमें केजीएमयू प्रशासन ने कार्यपरिषद के आरोप को झूठा साबित करते हुए कहा था कि किट की खरीदारी में कोई गड़बड़ी नहीं हुई थी और सभी आरोप बेबुनियाद हैं।
किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में पैथालॉजी जांच किट की खरीदारी और गड़बड़ी को लेकर सीएम को जवाब दिया गया है कि कार्यपरिषद के आरोप गलत हैं। उन्होंने अपने स्तर पर किट की खरीदारी पर रोक लगवाई थी।
किट को लेकर किसी तरह की कोई गड़बड़ी नहीं है। मालूम हो कि वर्ष 2013 में केजीएमयू की पैथालॉजी के लिए 70 लाख रुपये की किट की खरीदारी की गई थी।
बिना टेंडर की प्रक्रिया के हुई किट की खरीदारी पर केजीएमयू कार्यपरिषद और रजिसट्रार ने ही आपत्ति जताई थी जिसके बाद भी किट की खरीदारी बंद करने की मांग की गई थी।
मार्च 2014 में कंपनी किट का पैसा मांगने पहुंची तो केजीएमयू प्रशासन ने पैसा देने से मना कर दिया। मामला उठने के बाद बसपा विधायक रामहेत भारती ने मुख्यमंत्री से इस गड़बड़ी पर विधानसभा सत्र में सवाल पूछ दिया।
इसके बाद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मामले की जानकारी के लिए कुलपति से जवाब तलब किया। केजीएमयू प्रशासन ने मामले मुख्यमंत्री को जानकारी दी है कि किट की खरीदारी में कोई गड़बड़ी नहीं हुई थी।
केजीएमयू प्रशासन के इस जवाब ने कार्यपरिषद को ही झूठा साबित कर दिया है। चर्चा अब ये भी होने लगी है कि केजीएमयू प्रशासन ने साख बचाने के लिए कार्यपरिषद को बलि का बकरा बना दिया है।
सूत्र बताते हैं कि गड़बड़ी हुई थी इसी कारण से किट की खरीदारी पर रोक लगाने की बात चली थी। सीएम को ऐसा जवाब क्यों दिया गया इसको लेकर भीतर ही भीतर कयासों का बाजार गरम है।
सूत्र बताते हैं कि पैथालॉजी के लिए ऐसी कंपनी से मशीन खरीदी गई जिसमें उसी कंपनी के रीजेंट लगाए जा सकते हैं। यही कारण है कि अब न चाहते हुए भी उसी कंपनी की किट खरीदना मजबूरी हो गई है।