फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

KGMU: कार्य परिषद में शामिल नहीं किए गए दलित व पिछड़े वर्ग के प्रोफेसर, राजभवन ने कुलपति को भेजा पत्र

Wed, 06 May 2026 11:05 AM IST
Ishwar Ashish Bhartiya अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

केजीएमयू कुलपति और कुलसचिव को शासन से पत्र भी जारी किया गया। इसके बाद भी केजीएमयू प्रशासन ने पिछड़े और दलित वर्ग के प्रोफेसरों को कार्यपरिषद में शामिल नहीं किया। पूरे मामले को लेकर विधायक जय देवी ने भी राज्यपाल को पत्र लिखा। 
विज्ञापन
- फोटो : amar ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

केजीएमयू की कार्यपरिषद में अभी तक दलित व पिछड़े वर्ग के प्रोफेसरों को शामिल नहीं किया गया है। इसे लेकर राजभवन ने केजीएमयू कुलपति को पत्र भेजा है। प्रदेश सरकार ने दो जनवरी 2026 को केजीएमयू की नियमावली में बदलाव किया था। इसे किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय उत्तर प्रदेश (संशोधन) अधिनियम 2025 नाम दिया गया है।

विज्ञापन


इसके तहत केजीएमयू अधिनियम की धारा 24(1) में यह व्यवस्था दी गई है कि कार्यपरिषद में अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग के वरिष्ठतम आचार्य को भी शामिल किया जाए। इस संबंध में केजीएमयू कुलपति और कुलसचिव को शासन से पत्र भी जारी किया गया। इसके बाद भी केजीएमयू प्रशासन ने पिछड़े और दलित वर्ग के प्रोफेसरों को कार्यपरिषद में शामिल नहीं किया।

पूरे मामले को लेकर विधायक जय देवी ने भी राज्यपाल को पत्र लिखा। इसके बाद भी केजीएमयू प्रशासन ने सदस्यों का मनोनयन नहीं किया। ऐसे में केजीएमयू कार्यपरिषद के सदस्य डा. सुरेश अहिरवार ने राज्यपाल को ज्ञापन भेजा। विभिन्न स्तर से लगातार मिल रहे ज्ञापन के बाद राजभवन ने पूरे मामले को संज्ञान में लिया है। 
विज्ञापन


राज्यपाल के विशेष कार्याधिकारी डा. पंकज कुमार एल जानी ने 24 अप्रैल को केजीएमयू कुलपति को पत्र भेजा। इसमें दलित एवं पिछड़े वर्ग के प्रोफेसरों को कार्यपरिषद में शामिल करने के संबंध में आए विभिन्न पत्रों का हवाला दिया। यह भी निर्देश दिया है कि पूरे मामले में त्वरित कार्रवाई की जाए। इस संबंध में केजीएमयू प्रवक्ता डा. केके सिंह का कहना है कि मामले में प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही प्रोफेसरों का मनोनयन किया जाएगा।

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें