केजीएमयू ने रोबोटिक सर्जरी के लिए फिर शुरू की कोशिशें।
लखनऊ। केजीएमयू में रोबोटिक सर्जरी के लिए एक बार फिर प्रयास शुरू हो गया है। केजीएमयू प्रशासन को उम्मीद है कि नए बजट में उसे रोबोट के लिए अतिरिक्त धन मिल सकता है। थोरेसिक सर्जरी सहित कई सुपर स्पेशिएलिटी विभागों को संसाधनों से संपन्न बनाने के लिए भी सरकार से अतिरिक्त बजट की मांग की गई है। यह जानकारी कुलपति लेफ्टिनेंट जनरल डॉ. बिपिन पुरी ने दी। वह 6 माह का कार्यकाल पूरा होने पर यूनिवर्सिटी में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
कुलपति ने बताया कि रोबोट स्थापित करने के लिए यूनिवर्सिटी में जगह भी तय कर ली गई है। इससे न्यूरो सर्जरी, गैस्ट्रो सर्जरी, यूरो सर्जरी सहित विभिन्न सुपर स्पेशिएलिटी सर्जरी को बढ़ावा मिलेगा और गंभीर मरीजों की अति सूक्ष्म सर्जरी की जा सकेगी। कुलपति ने बताया कि कोरोना से पीड़ित मरीजों के इलाज के लिए डेडिकेटेड हॉस्पिटल बनाने से पूरे प्रदेश को फायदा मिला है। पॉजिटिव मरीजों की संख्या बेहद कम हो गई है। ऐसे में यूनिवर्सिटी में सामान्य मरीजों की ओपीडी भी शुरू कर दी गई है। सर्जरी सहित अन्य प्रोसीजर निरंतर चल रहे थे। फिर भी जिन मरीजों की सर्जरी लंबित थी उन्हें कॉल करके बुलाया जा रहा है और सर्जरी की जा रही है। इस दौरान डीन डॉ. उमा सिंह, डॉ. अनिल चंद्रा, डॉ. एसएन शंखवार, डॉ. ऋषि शेट्टी, डॉ. विनोद जैन आदि मौजूद रहे।
थोरेसिक सर्जरी सहित कई विभाग में बढ़ेंगे संसाधन
कुलपति ने बताया कि यूनिवर्सिटी में थोरेसिक सर्जरी, वैस्कुलर सर्जरी, मेडिकल आंकोलॉजी सहित कई विभागों में संसाधन लगातार बढ़ाए जा रहे हैं। पेट सीटी स्कैन मशीन लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। खाली पदों को भरने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। इसी तरह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर भी कार्य चल रहा है। कुलपति ने कहा कि लिवर ट्रांसप्लांट को फिर से शुरू करने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही प्रयास है कि जल्द से जल्द नेफ्रोलॉजिस्ट का इंतजाम हो जाए।
प्री-हॉस्पिटल केयर ट्रॉमा
कुलपति ने बताया कि यूनिवर्सिटी की ओर से प्री-हॉस्पिटल केयर ट्रॉमा शुरू करने का भी प्रयास किया जा रहा है। इसके तहत 10 किलोमीटर के रेडियस में कहीं भी हादसा होने पर ट्रामा की टीम मौके पर पहुंचेगी और संबंधित को प्राथमिक उपचार देकर ट्रामा सेंटर ले आएगी।