बसपा सुप्रीमो मायावती पर अभद्र टिप्पणी करने वाले दयाशंकर सिंह को भाजपा ने पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया है। सिंह ने मंगलवार को मऊ में एक कार्यक्रम में मायावती को लेकर अभद्र टिप्पणी की थी। बुधवार को इस बयान की क्लिपिंग सार्वजनिक हुई तो हंगामा हो गया।
इस मामले में विवाद खड़ा होने पर दयाशंकर सिंह ने माफी मांग ली थी, लेकिन इससे दलितों में भाजपा को लेकर नाराजगी बढ़ने की आशंका देख पार्टी ने उन्हें दल से बाहर कर देने में ही भलाई समझी। बुधवार शाम उन्हें पहले पार्टी उपाध्यक्ष पद से हटाया गया।
पर, हमले नहीं रुके तो देर रात पार्टी से भी निष्कासित करने का फैसला ले लिया गया। एक उच्च पदस्थ पदाधिकारी ने दयाशंकर सिंह को पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित करने की पुष्टि की है।
प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य ने कहा है कि दयाशंकर के बयान की भाजपा कड़ी निंदा करती है तथा उनके बयान के लिए खेद व्यक्त करती है। उन्होंने प्रदेश के अन्य सभी पार्टी पदाधिकारियों तथा कार्यकर्ताओं को इस तरह के बयानों से दूर रहने की हिदायत दी है।
कहा है कि पार्टी के लोग विरोधी दलों या नेताओं की कार्यशैली को लेकर वक्तव्य और भाषण में संयत और संतुलित भाषा का ही इस्तेमाल करें। किसी भी स्थिति में मर्यादा की सीमा से बाहर न जाएं।
दयाशंकर 12 जुलाई को बने थे उपाध्यक्ष
दयाशंकर सिंह
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दयाशंकर गत 12 जुलाई को भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष बनाए गए थे। इससे पहले वे लगातार दो बार से भाजपा के प्रदेश मंत्री थे। उससे पहले वे युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके थे।
दो बार पार्टी की तरफ से विधान परिषद का चुनाव लड़ चुके दयाशंकर गृहमंत्री राजनाथ सिंह के पुत्र पंकज सिंह को महामंत्री बनाए जाने पर नाराज होकर राजनाथ के खिलाफ बयान देकर पहले भी चर्चा में आए थे।
दयाशंकर बोले, मुझे अपने बयान पर दुख
इस बीच, दयाशंकर सिंह ने कहा है कि वह सपने में भी किसी महिला का अपमान करने की नहीं सोच सकते। बकौल सिंह, ‘मैं मायावती का सम्मान करता हूं।
मायावती पर कोई असम्मानजनक टिप्पणी नहीं की थी। न किसी से उनकी तुलना की थी। सिर्फ उदाहरण दिया था। फिर भी जो कुछ हुआ, उसके लिए खेद व्यक्त करता हूं। अपनी बात पर माफी मांगता हूं। दुख व्यक्त करता हूं।’