योग से दूर होता है रोग तो दवा क्यों बना रहे
हास्य कवि सुरेंद्र शर्मा ने बताया कि एक बार मैंने बाबा रामदेव से पूछा, ‘बाबा, अगर योग से रोग दूर होता है तो तू दवाई क्यों बना रहा है?’ इस पर काफी देर तक पूरा हाल ठहाकों से गूंजता रहा। इसके बाद उन्होंने कहा कि एक बार मैंने अन्ना हजारे जी से पूछा, ‘भ्रष्टाचार के खिलाफ नारे और झंडे तो अक्सर उठाते हैं, लेकिन जब मुंबई में बाहरी लोग मारे जा रहे थे तो झंडा क्यों नहीं उठाया? अगर महाराष्ट्र में मराठी, गुजरात में गुजराती ही रहेंगे तो भारतीय कहां रहेंगे?’
‘मैं अकेला था इंटेलीजेंट, अब मोदी भी आ गए’
बाबा रामदेव के बाद सुरेंद्र शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर रुख किया तो श्रोताओं की अनायास हंसी फूट गई। उन्होंने कहा कि इस दुनिया में अब तक मैं ही इंटेलिजेंट था, अब मोदी जी भी आ गए। हमने ऐसी बात कह दी कि दुनिया आज तक पकड़ नहीं पाई। मोदी जी ने कहा कि अच्छे दिन आएंगे, लेकिन न तारीख बताई न साल। मैंने भी अपनी पत्नी से कहा था कि प्यार करूंगा लेकिन न तारीख बताई न साल।
मोहब्बत दूर से चलकर नंगे पांव आई है...
नैनीताल से आई कवयित्री गौरी मिश्रा ने तहजीब के शहर को सलाम करते हुए कहा कि ‘घुटन को छोड़ शहरों की तुम्हारे गांव आई हैं। मोहब्बत दूर से चलकर कि नंगे पाव आई है। उन्होंने नई रचना ‘मिलाकर वक्त से आंखें हर एक लम्हा चुरा लें हम। चलो आज अपने गम पे मुस्कुरा लें हम।’ सुनाकर तालियां बटोरीं। उन्होंने सहयोगी कवि अशोक सुंदरानी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि ‘न दुआ से मिलती है न दवा से। मुहब्बत रहमते खुदा से मिलती है। इनकी सूरत बड़े भइया से मिलती है।’ इस पर श्रोता काफी देर से तालियां बजाते रहे।
क्या हमें गूगल से डाउनलोड किया गया है...
मशहूर हास्य कवि अशोक सुंदरानी ने एक जूते के दर्द को बयां करते हुए पढ़ा- हम अब तक आशिकों पर पड़कर खुश थे, क्या जरूरत थी कि भ्रष्ट नेताओं पर चला दिया...। उन्होंने अपनी चर्चित रचना ‘जूते के दर्द’ से श्रोताओं को रूबरू कराया। गौरी मिश्रा के साथ हास्य भरी छेड़छाड़ से शुरुआत करते हुए कहा कि गौरी अक्सर कहती हैं कि भगवान ने उन्हें फुर्सत में बनाया है। मैं उनसे ये पूछता हूं कि हमें क्या गूगल से डाउनलोड किया गया है। इस पर हाल काफी देर तक ठहाकों से गूंजता रहा। उन्होंने अमर उजाला द्वारा शहर के प्रबुद्धजनों के सम्मान को बड़ा काम बताया। उन्होंने कहा कि कंप्यूटर-इंटरनेट के समय में बच्चे हमसे पहले बड़े हो रहे हैं। 8 साल का बेटा स्कूल से आकर बोला कि पापा, मैडम इतनी क्यूट है कि मन करता है कि दिनभर पढ़ाती रहें। मैंने डाटा कि बेटा, ऐसा नहीं मैडम के बारे में बोलते हैं। जवाब मिला, पापा आप हमेशा अपने जुगाड़ में लगे रहते हो। उन्होंने अपनी प्रस्तुति के अंत में सैनिकों का सम्मान करने को कहा।
महादेवी, श्रीदेवी की बड़ी बहन होंगी...
हास्य कवि पवन आगरी ने भी नेताओं, भ्रष्टाचार व समाज में आ रहे बदलावों को बखूबी अपनी रचनाओं में पिरोया। शुरुआत नेताओं के चुनावी टिकट से की। उन्होंने कहा कि पहले नेता ये कहकर टिकट मांगते थे कि हमें वहां से टिकट दें, मैं वहां से जीतूंगा। आज के नेता कहते हैं, मुझे वहां से टिकट मत दें, मैं वहां से हार जाऊंगा। उन्होंने कहा कि पहले लड़की जींस पहनने से पहले अपनी मां से पूछती थीं। आज जब लड़की मां से पूछती हैं कि शार्ट पहन लूं, मां कहती है कुछ तो पहन ले। इस पर काफी देर तक हंसी के फव्वारे छूटे। उन्होंने कहा कि बदलाव आज साफ देखा जा सकता है। आज का हर युवा ऐश्वर्या और मल्लिका शेरावत से परिचित है। मैंने अपने एक परिचित के बच्चे से पूछा कि महादेवी कौन थीं, जवाब मिला श्रीदेवी की बड़ी बहन का नाम होगा।