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‘महफिलों में हंस लेंगे, तन्हाई में रो लेंगे...’

Fri, 01 Aug 2014 10:00 AM IST
नीरज 'अम्बुज'/अमर उजाला, लखनऊ
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दिलकश नगमों और अशआरों से रूमानियत का ऐसा माहौल तैयार हुआ कि श्रोताओं की वाहवाही का सिलसिला देर रात तक चलता रहा।
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मौका था, उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक इंजीनियर एपी मिश्र की पुस्तक ‘सिफर से शिखर तक’ के प्रकाशन के उपलक्ष्य में एक निजी होटल में आयोजित काव्य संध्या का। जिसमें प्रदेश केतमाम शायरों व कवियों ने शिरकत की।

महफिल की शुरूआत शायर हसन काजमी ने ‘महफिलों में हंस लेंगे, तन्हाई में रो लेंगे...’ गीत सुनाकर की।

अध्यक्षता करते हुए मशहूर शायर मुनव्वर राणा ने ‘मेरी तामीर के किस्से कहीं लिखे न जाएंगे, मैं जंगल से गुजरने के लिए रास्ता बनाता हूं’ पंक्तियां सुनाकर श्रोताओं की वाहवाही लूटी।
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मंच संभालने पर शायर डॉ. तारिक कमर ने ‘ऐ हवा ऐसी भी जल्दी क्या है, क्या कहीं आग लगानी है अभी’ अशआर सुनाए। कवियित्री डॉ. सुमन दुबे ने सुनाया कि ‘जब सफर में कहीं निकलते हैं, हादसे साथ-साथ चलते हैं’।
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मशहूर शायर मंजर भोपाली ने ‘प्यार के साथ जो तुम प्यार निभाते जाते, दिल को कदमों के तले हम भी बिछाते जाते...’ सुनाकर श्रोताओं का दिल लूट लिया।

इसके बाद आए शायर हसीब सोज ने ‘हमारे दोस्तों में कोई दुश्मन हो भी सकता है, यह अंग्रेजी दवाएं हैं रिएक्शन हो भी सकता है’ और शायरा डॉ. नसीम निकहत ने ‘तुम्हारे बाद सफर में कोई मजा न रहा, हर एक मोड़ पे सोचा कि लौट जाए क्या’ सुनाकर महफिल को गुलजार किया। कवि बुद्घिसेन शर्मा और पप्लू लखनवी ने भी रचनाएं पेश कीं।
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