''ऋतु वर्षा'' के भावों से जीवंत हुआ कथक
लखनऊ। भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय में चल रही पांच दिवसीय मास्टर क्लास में शुक्रवार को ''ऋतु वर्षा'' की सुंदर भाव-अभिव्यक्ति पर विशेष प्रशिक्षण दिया गया। वरिष्ठ गुरु पंडित राम मोहन महाराज ने विद्यार्थियों को कथक के तकनीकी पक्ष तिहाई, टुकड़े, उठान और चक्करों भावों का अभ्यास कराया।
कार्यशाला का मुख्य आकर्षण वर्षा ऋतु के भावों की प्रस्तुति रही, जहां प्रशिक्षुओं ने प्रकृति के सौंदर्य को नृत्य के माध्यम से उतारना सीखा। इस दौरान कला मंडपम सभागार का वातावरण शास्त्रीय नृत्य की ऊर्जा और गुरु-शिष्य परंपरा के उत्साह से सराबोर रहा। पंडित असीम बंधु भट्टाचार्य और सहायक आचार्य डॉ. मंजुला पंत व अन्य लोग मौजूद रहे। पंडित विष्णु नारायण भातखंडे की स्मृति में स्थापित पीठ के अंतर्गत तालवाद्य विभाग की ओर से दो दिवसीय तबला कार्यशाला का शुभांरभ हुआ। सुजान सभागार में विशेषज्ञ वक्ता प्रो. नीलू शर्मा ने फर्रुखाबाद घराने की बोल-निकास की तकनीकी विशेषताओं और पारंपरिक वादन शैली की प्रस्तुति दी। साथ ही, सौंदर्यात्मक विशेषताओं पर प्रकाश डाला। गायन विभागाध्यक्ष प्रो. सृष्टि माथुर, तालवाद्य विभागाध्यक्ष डॉ. मनोज कुमार मिश्र आदि लोग मौजूद रहे।
''ऋतु वर्षा'' के भावों से जीवंत हुआ कथक
''ऋतु वर्षा'' के भावों से जीवंत हुआ कथक