गरीब छात्राओं को शिक्षा देने के नाम पर चलने वाले खेल पर रोक लगाने की तैयारी है।
कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों की सूरत ठीक करने के साथ इसमें रहने वाली छात्राओं की सुविधाओं में और इजाफा किया जाएगा।
इसके लिए शासन, निदेशालय और मंडल स्तर के अधिकारियों से इसकी जांच कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर इसमें सुधार की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
सूबे में कुल 740 कस्तूरबा विद्यालय
प्रदेश में 740 कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय हैं। इन स्कूलों में कक्षा 6, 7 व 8 की शिक्षा छात्राओं को मुफ्त दी जाती है। इनमें पढ़ने वाली छात्राओं को वहीं पर रखने के साथ खाने-पीने की व्यवस्था भी की जाती है। किसी स्कूल में 100 तो किसी में 50 छात्राएं रह रही हैं।
केंद्रीय सहायता से चलने वाले इन स्कूलों में रहने वाली छात्राओं को जिले के अधिकारियों की लापरवाही से अच्छी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
इसलिए सर्व शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना निदेशालय ने तय किया है कि इसमें सुधार के साथ गड़बड़ियां रोकी जाएं।
इसके आधार पर शासन, निदेशालय और मंडल स्तर के अधिकारियों को इसकी जांच की जिम्मेदारी दी गई है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि उन स्कूलों की विशेष रूप से जांच की जाए जो स्वयंसेवी संस्थाओं की सहायता से चल रहे हैं।
जांच के दौरान यदि इन स्कूलों में किसी तरह की गड़बड़ी मिलती है तो स्वयंसेवी संस्थाओं का अनुबंध रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।