लखनऊ। घर और बगीचे में लगे कई पौधे देखने में खूबसूरत होते हैं, लेकिन उनके बीज, फल, पत्ते या फूल जहरीले हो सकते हैं। कनेर, रत्ती और धतूरा जैसे पौधों से होने वाली विषाक्तता को समझने और इनकी सही पहचान के लिए केजीएमयू में ''कश्यप उपवन'' टॉक्सिकोलॉजी गार्डन तैयार किया गया है। बुधवार को कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने इसका उद्घाटन किया।
गार्डन में जहरीले और चिकित्सकीय दृष्टि से महत्वपूर्ण पौधों को उनके स्थानीय और वैज्ञानिक नाम के साथ प्रदर्शित किया गया है। साथ ही उनसे होने वाली विषाक्तता की जानकारी दी गई है। कुलपति ने बताया कि इससे मेडिकल विद्यार्थियों को पौधों की पहचान का व्यावहारिक अनुभव मिलेगा और आम लोगों को भी इनके खतरों के बारे में जागरूक किया जा सकेगा।
संस्थान के फॉरेंसिक मेडिसिन एवं टॉक्सिकोलॉजी विभाग ने पांच से सात अक्तूबर तक टॉक्सिकोमेनिया-3 कार्यक्रम आयोजित किया। इसके तहत सानियावा गांव में ग्रामीणों को कीटनाशक, घरेलू रसायन, जहरीले पौधों और सांप के जहर से बचाव की जानकारी दी गई। विषाक्तता होने पर बिना सलाह उल्टी कराने या घरेलू उपचार के बजाय मरीज को तुरंत अस्पताल पहुंचाने की सलाह दी गई।