लखनऊ। बीरबल साहनी मार्ग स्थित पंडित गोविंद वल्लभ पंत सांस्कृतिक उपवन में जारी उत्तराखंड महोत्सव में इस बार कश्मीर कपड़ों की गर्माहट का असर साफ दिख रहा है, जहां मंच पर लोक संस्कृति की झलक बिखेरते कलाकार दर्शकों का मन मोह रहे हैं, वहीं दूसरी ओर महिलाओं को कश्मीरी शॉल और कुर्ते खासे पसंद आ रहे हैं।
सोमवार दोपहर से ही कश्मीरी कपड़ों के स्टॉल पर खरीदारों की भीड़ लगनी शुरू हो गई। सुंदर कढ़ाई, हल्के वजन और बेहतरीन गर्माहट के कारण पश्मीना शॉल और कश्मीरी कुर्ते महिलाओं को आकर्षित कर रहे हैं। इस बार सबसे ज्यादा मांग ‘राइजिंग पश्मीना शॉल’ की है, जिसकी शुरुआती कीमत 5,000 रुपये है।
कश्मीरी व्यापारी आमिर अब्बास ने बताया कि यह शॉल अंधेरे में हल्की चमक बिखेरता है। पश्मीना सिल्क शॉल भी महिलाओं की पहली पसंद बना हुआ है, जिसकी शुरुआती कीमत 2,000 रुपये है। लद्दाख की चांगथांगी और पूर्वी हिमालय की चेंगू बकरियों के महीन ऊन से यह शॉल तैयार किया जाता है। महीनों की मेहनत से तैयार यह शॉल मुलायम, हल्का और बेहद गर्माहट देने वाला होता है। कश्मीरी कुर्ता सेट और कुर्ती कपड़ों की भी मांग जोरों पर है, जिनका वजन गर्मियों के कपड़ों जितना हल्का है।
कश्मीरी शॉल-कुर्ता और उनकी खासियतें सोजनी शॉल: बारीक सुई से फूलों की कढ़ाई, शुरुआती कीमत 1,500 रुपये।
कानी शॉल: हस्तनिर्मित पश्मीना ऊन से बने हल्के व गर्म शॉल, शुरुआती कीमत 5,000 रुपये।
फेरन कुर्ता: पारंपरिक ढीला ऊनी कुर्ता, बारीक आरी या सुई बिंदु कढ़ाई, शुरुआती कीमत 4,000 रुपये।
सोजनी कढ़ाई कुर्ती : बेहद महीन सुई से बनी कढ़ाई, जो पेंटिंग जैसी लगती है, शुरुआती कीमत 5,000 रुपये।
वूलन-पश्मीना मिक्स कुर्ती: ऊनी और पश्मीना मिश्रित कपड़े, बंधनी या जयपुरी प्रिंटिंग के साथ, कीमत 3,000 रुपये।
महिलाओं को खूब भा रहे कश्मीरी शॉल और कुर्ते
महिलाओं को खूब भा रहे कश्मीरी शॉल और कुर्ते