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विजय दिवस पर शहीदों को किया नमन, राहुल गांधी के आंख मारने पर कवियों ने किया तंज

Thu, 26 Jul 2018 11:42 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीतापुर
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‘एक शाम शहीदों के नाम’ कार्यक्रम का एक दृश्य। - फोटो : amar ujala
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अमर उजाला परिवार की ओर से ‘कारगिल विजय दिवस’ पर ‘एक शाम शहीदों के नाम’ कार्यक्रम में देश के प्रख्यात कवियों ने शहीदों को नमन करती हुई काव्य रचनाओं की फुहारें बरसाई तो सभागार का माहौल देशभक्ति के जज्बे से ओत-प्रोत नजर आया। मुख्य अतिथि प्रदेश के ग्राम्य विकास राज्यमंत्री महेन्द्र कुमार सिंह द्वारा कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।

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इसके बाद शहीद कैप्टन मनोज पांडेय के पिता गोपीनाथ पांडेय समेत देश की सरहद पर दुश्मनों के छक्के छुड़ाने वाले 10 पूर्व सैनिकों को अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया।
मुख्य अतिथि राज्यमंत्री महेन्द्र कुमार सिंह ने कहा कि सरहद पर सैनिक अपनी जान की परवाह किए बगैर हर समय डटे खड़े रहते हैं। उन्हीं के दम पर हम अपने घरों में चैन की नींद सो पाते हैं। शहीदों को सम्मानित करने वाले इस कार्यक्रम के आयोजन को लेकर मुख्य अतिथि ने अमर उजाला परिवार की सराहना की।
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तत्पश्चात काव्य श्रद्धांजलि की शुरुआत लखनऊ से आई प्रख्यात कवयित्री कविता तिवारी द्वारा अपने ओजस्वी स्वर में ‘सारी धरा तुम्हारे ही गीत गा रही है, ऐसा लगा तू मधुरिम वीणा बजा रही है, आ जाओ मंच पर भी आसन यहीं लगा लो, देवी सरस्वती मां बेटी बुला रही है...’ पंक्तियों से मां सरस्वती की वंदना कर की गई। इसके बाद कवियों के काव्य पाठ का दौर चल निकला। शहीदों के नमन में एक के बाद एक कवियों ने अपनी रचनाओं की बेहतरीन प्रस्तुतियों से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। हर एक लाइन के बाद श्रोताओं ने तालियों की गड़गड़ाहट से काव्य रचनाओं को भरपूर सम्मान दिया।

देर रात तक चले इस कवि सम्मेलन के दौरान शहर के जीके ग्राण्ड का सभागार देशभक्ति की भावना से सराबोर होता रहा। इस मौके पर सदर विधायक राकेश राठौर, महेन्द्र यादव, ज्ञान तिवारी, एमएलसी आनंद भदौरिया, डीएम शीतल वर्मा, एडीएम विनय पाठक, पुलिस अधीक्षक प्रभाकर चौधरी आदि मौजूद थे।

शहीदों की करो पूजा तो हिंदुस्तान बदलेगा...

सम्मानित किए गए शहीदों के परिवारीजन। - फोटो : amar ujala
कवि सम्मेलन में लखनऊ की प्रख्यात कवयित्री कविता तिवारी ने मंच पर ज्यों ही माइक संभाला सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। कविता ने अपने ओजस्वी स्वर में काव्यपाठ शुरू किया तो हर कोई उनकी आवाज के जादू में बंध सा गया। कविता ने ‘क्षितिज पर शौर्य गूंजेगा स्वयं दिनमान बदलेगा उतारो भारती की आरती सम्मान बदलेगा, विवादों में उलझकर कीर्ति माँ की मत करो धूमिल, शहीदों की करो पूजा तो हिंदुस्तान बदलेगा’ सुनाकर श्रोताओं के दिलों में देशभक्ति का जज्बा पैदा कर दिया।

जरा सा साथ दो तो दुनिया की कहानी कहूं...
मुंबई से आए कवि दिनेश बावरा ने अपनी रचना में अवधी भाषा का समावेश करते हुए सुनाया ‘दूध को दूध पानी को पानी कहूं, मेघ की गर्जना दरिया की रवानी कहूं, कैस ने लैला को जो भेजा था निशानी कहूं  अगर यूं ही चुप रहे तो कुछ कह न पाऊंगा, जरा सा साथ दो तो दुनिया की कहानी कहूं’ रचना सुनाकर खूब तालियां बटोरी।

बढ़ाई राष्ट्रध्वज की शान उनको है नमन मेरा
शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करती काव्य रचना सुनाकर झारखंड के प्रख्यात कवि विनय विनम्र ने श्रोताओं की वाहवाही लूटी। उन्होंने सुनाया ‘वतन पे जो हुए कुर्बान उनको है नमन मेरा, मिटा सर्वस्व हैं अंजान उनको है नमन मेरा, उठा शमशीर बन रणवीर माँ की पीर हर ली है, बढ़ाई राष्ट्रध्वज की शान उनको है नमन मेरा’। इसके अलावा विनय ने अपनी कई अन्य रचनाओं की प्रस्तुतियों से भी श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कट जाए शीश रंचमात्र होगा क्लेश नहीं

मंच पर मौजूद कवि। - फोटो : amar ujala
कवि सम्मेलन का संचालन कर रहे हरदोई के प्रख्यात कवि देवेश तिवारी की काव्य प्रस्तुति को श्रोताओं ने खूब सराहा। कवि देवेश ने ‘कसम तिरंगे की लिए जो गया युद्धभूमि पीछे हटता नहीं जवान मेरे देश का, कट जाए शीश रंचमात्र होगा क्लेश नहीं घटने न पाए स्वाभिमान मेरे देश का’ सुनाया तो श्रोता वाह-वाह कर उठे।

लोकतंत्र को राजनीति के गुंडों की बंदूक खा गई
सोनभद्र से आए कवि डा. कमलेश राजहंस ने महंगाई और वर्तमान राजनीति पर करारी चोट करती हुई अपनी काव्य रचना में कहा कि ‘महंगाई की कठिन मार को जनता बनकर मूक खा गई, भूख मिटाता है जो सबकी उस किसान को भूख खा गई, मेरे देश की क्रूर सियासत मुर्दो का संदूक खा गई, लोकतंत्र को राजनीति के गुंडों की बंदूक खा गई’। उनकी इस कविता को श्रोताओं ने खूब सराहा।

मरने पर फिर कफन बस तिरंगा मिले
एक सैनिक और देशभक्त नागरिक की मंशा को प्रदर्शित करती कवि जगजीवन मिश्र की इन लाइनों ‘प्यार माँ जैसा हो वारि गंगा मिले ना मिले लूट और ना ही दंगा मिले, है तमन्ना मरूं तो वतन के लिए मरने पर फिर कफन बस तिरंगा मिले’ ने श्रोताओं की जमकर तालियां बटोरीं।
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वहां पर स्वर्ग में बापू के पुरखे तर गए होंगे

कार्यक्रम में मौजूद मुख्य अतिथि व स्रोतागण। - फोटो : amar ujala
देशभक्ति के माहौल में कवि प्रियांशु गजेंद्र ने अपनी हास्य रचना से सभागार में ठहाके लगवाए। प्रियांशु ने सुनाया ‘पहन खादी का कुरता आपने जब आंख मटकाई, वहां पर स्वर्ग में बापू के पुरखे तर गए होंगे’।

कार्यक्रम में इनका हुआ सम्मान
‘एक शाम शहीदों के नाम’ कार्यक्रम में परमवीर चक्र विजेता शहीद कैप्टन मनोज पांडेय के पिता गोपीनाथ पांडेय के अलावा चीन व पाकिस्तान से युद्ध लड़ने वाले 10 पूर्व सैनिकों को अंगवस्त्र व स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया।

सम्मानित होने वाले पूर्व सैनिकों में सिपाही रमाकांत मिश्र, नायक गुरुदीन प्रसाद, नायक आरसी द्विवेदी, नायक प्रमोद कुमार ‘फौजी’, सूबेदार विनय अग्रवाल, एसीपी राकेश, हवलदार हरेराम फौजी, नायक नंद किशोर, नायक सूबेदार दधिबल श्रीवास्तव, हवलदार स्वर्गीय कुलभूषण शर्मा के पुत्र रमन शर्मा शामिल थे।
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