सम्मानित किए गए शहीदों के परिवारीजन।
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कवि सम्मेलन में लखनऊ की प्रख्यात कवयित्री कविता तिवारी ने मंच पर ज्यों ही माइक संभाला सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। कविता ने अपने ओजस्वी स्वर में काव्यपाठ शुरू किया तो हर कोई उनकी आवाज के जादू में बंध सा गया। कविता ने ‘क्षितिज पर शौर्य गूंजेगा स्वयं दिनमान बदलेगा उतारो भारती की आरती सम्मान बदलेगा, विवादों में उलझकर कीर्ति माँ की मत करो धूमिल, शहीदों की करो पूजा तो हिंदुस्तान बदलेगा’ सुनाकर श्रोताओं के दिलों में देशभक्ति का जज्बा पैदा कर दिया।
जरा सा साथ दो तो दुनिया की कहानी कहूं...
मुंबई से आए कवि दिनेश बावरा ने अपनी रचना में अवधी भाषा का समावेश करते हुए सुनाया ‘दूध को दूध पानी को पानी कहूं, मेघ की गर्जना दरिया की रवानी कहूं, कैस ने लैला को जो भेजा था निशानी कहूं अगर यूं ही चुप रहे तो कुछ कह न पाऊंगा, जरा सा साथ दो तो दुनिया की कहानी कहूं’ रचना सुनाकर खूब तालियां बटोरी।
बढ़ाई राष्ट्रध्वज की शान उनको है नमन मेरा
शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करती काव्य रचना सुनाकर झारखंड के प्रख्यात कवि विनय विनम्र ने श्रोताओं की वाहवाही लूटी। उन्होंने सुनाया ‘वतन पे जो हुए कुर्बान उनको है नमन मेरा, मिटा सर्वस्व हैं अंजान उनको है नमन मेरा, उठा शमशीर बन रणवीर माँ की पीर हर ली है, बढ़ाई राष्ट्रध्वज की शान उनको है नमन मेरा’। इसके अलावा विनय ने अपनी कई अन्य रचनाओं की प्रस्तुतियों से भी श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कवि सम्मेलन का संचालन कर रहे हरदोई के प्रख्यात कवि देवेश तिवारी की काव्य प्रस्तुति को श्रोताओं ने खूब सराहा। कवि देवेश ने ‘कसम तिरंगे की लिए जो गया युद्धभूमि पीछे हटता नहीं जवान मेरे देश का, कट जाए शीश रंचमात्र होगा क्लेश नहीं घटने न पाए स्वाभिमान मेरे देश का’ सुनाया तो श्रोता वाह-वाह कर उठे।
लोकतंत्र को राजनीति के गुंडों की बंदूक खा गई
सोनभद्र से आए कवि डा. कमलेश राजहंस ने महंगाई और वर्तमान राजनीति पर करारी चोट करती हुई अपनी काव्य रचना में कहा कि ‘महंगाई की कठिन मार को जनता बनकर मूक खा गई, भूख मिटाता है जो सबकी उस किसान को भूख खा गई, मेरे देश की क्रूर सियासत मुर्दो का संदूक खा गई, लोकतंत्र को राजनीति के गुंडों की बंदूक खा गई’। उनकी इस कविता को श्रोताओं ने खूब सराहा।
मरने पर फिर कफन बस तिरंगा मिले
एक सैनिक और देशभक्त नागरिक की मंशा को प्रदर्शित करती कवि जगजीवन मिश्र की इन लाइनों ‘प्यार माँ जैसा हो वारि गंगा मिले ना मिले लूट और ना ही दंगा मिले, है तमन्ना मरूं तो वतन के लिए मरने पर फिर कफन बस तिरंगा मिले’ ने श्रोताओं की जमकर तालियां बटोरीं।
कार्यक्रम में मौजूद मुख्य अतिथि व स्रोतागण।
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देशभक्ति के माहौल में कवि प्रियांशु गजेंद्र ने अपनी हास्य रचना से सभागार में ठहाके लगवाए। प्रियांशु ने सुनाया ‘पहन खादी का कुरता आपने जब आंख मटकाई, वहां पर स्वर्ग में बापू के पुरखे तर गए होंगे’।
कार्यक्रम में इनका हुआ सम्मान
‘एक शाम शहीदों के नाम’ कार्यक्रम में परमवीर चक्र विजेता शहीद कैप्टन मनोज पांडेय के पिता गोपीनाथ पांडेय के अलावा चीन व पाकिस्तान से युद्ध लड़ने वाले 10 पूर्व सैनिकों को अंगवस्त्र व स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया।
सम्मानित होने वाले पूर्व सैनिकों में सिपाही रमाकांत मिश्र, नायक गुरुदीन प्रसाद, नायक आरसी द्विवेदी, नायक प्रमोद कुमार ‘फौजी’, सूबेदार विनय अग्रवाल, एसीपी राकेश, हवलदार हरेराम फौजी, नायक नंद किशोर, नायक सूबेदार दधिबल श्रीवास्तव, हवलदार स्वर्गीय कुलभूषण शर्मा के पुत्र रमन शर्मा शामिल थे।