‘कभी खुशी कभी गम’ में राष्ट्रगान का अपमान करने के मामले में निचली अदालत द्वारा फिल्म निर्देशक करन जौहर को बतौर आरोपी तलब करने के आदेश को चुनौती देने वाली निगरानी याचिका स्वीकार करते हुए एडीजे ध्रुवराज ने लोअर कोर्ट का आदेश खारिज कर दिया। जौहर पर प्रथमदृष्टया आरोप सही नहीं पाए गए।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि निचली अदालत का निष्कर्ष, पत्रावली पर जो साक्ष्य उपलब्ध है उसके खिलाफ है। निचली अदालत ने अपने मस्तिष्क का प्रयोग करके जौहर को बतौर आरोपी कोर्ट में तलब करने का आदेश दिया है।
निचली अदालत ने न्यायिक मस्तिष्क का प्रयोग नहीं किया। कोर्ट ने कहा, सेंसर बोर्ड ने इस फिल्म को प्रमाणपत्र जारी किया है। इसके बाद ही इसका देश-विदेश में प्रसारण हुआ। ऐसे में जौहर के खिलाफ प्रथमदृष्टया कोई ऐसा साक्ष्य उपलब्ध नहीं है जिसके आधार पर उन पर मुकदमा चलाया जाए।