लंबे समय से सामने आ रही शिकायतों के बाद पीएनसी इंफ्राटेक ने मरम्मत तेज की है। बुधवार को मौसम अनुकूल होने से काम में तेजी आई। हाईवे निर्माण से जुड़े विशेषज्ञों ने सवाल उठाया कि एक महीने पुराने एक्सप्रेसवे पर इतनी मरम्मत क्यों। यह स्थिति निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है।
पीएनसी मैनेजर सत्य नारायण का कहना है कि नेवरना के पास डिवाइडर ऊंचे नीचे हुए हैं, कोई बड़ी समस्या नहीं है। वाहनों और निर्माण मशीनों की आवाजाही में कुछ बोल्डर इधर-उधर हुए हैं। उसमें सुधार कराया जाएगा।
गृह विभाग ने भी एनएचएआई से मांगी स्टेटस रिपोर्ट
कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे में आ रही खामियों को लेकर गृह विभाग भी सक्रिय हो गया है। उसने एनएचएआई से स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। साथ ही निर्माण कार्य करने वाली फर्म पीएनसी इन्फ्राटेक लिमिटेड की अन्य परियोजनाओं पर इसके असर के बारे में भी जानकारी ली है। गृह विभाग के अधिकारी एनएचएआई के लखनऊ स्थित क्षेत्रीय कार्यालय के अधिकारियों से मिले। उन्होंने पूछा कि क्या पीएनसी को डिबार कर दिया गया है? एनएचएआई के अधिकारियों ने उन्हें बताया कि अभी कार्रवाई प्रक्रियाधीन है।
अब पुल की एप्रोच रोड धंसने लगी
असोहा (उन्नाव)। कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर यातायात शुरू होने के बाद से ही सड़क के अलग-अलग जगह धंसने और उखड़ने के मामले सामने आ रहे हैं। अब नेवरना गांव के पास एक्सप्रेसवे पर बने पुल की एप्रोच रोड धंसने लगी है। इंजीनियरों ने चेताया है कि यदि यहां पर सड़क धंसी तो यातायात बुरी तरह प्रभावित हो सकता है। नेवरना के पास किलोमीटर संख्या 53.6 पर पुल को जोड़ने वाली एप्रोच रोड पर लगे कंक्रीट के पत्थर ऊंचे-नीचे होकर खिसक रहे हैं। इसके कारण सड़क धंसान शुरू हो रही है। वहीं नेवरना के पास किलोमीटर संख्या 62.3 पर चार दिन पहले उखड़े पैबंद की मरम्मत अब तक शुरू नहीं हो सकी है। वाहनों के आवागमन से बनी नालियों (व्हील ट्रैक) की मरम्मत के लिए किए गए यातायात मार्ग परिवर्तन से चालकों को परेशानी हो रही है। उधर, कांथा गांव के पास 200 मीटर सड़क भी जगह-जगह धंसने से टूट गई है। पीएनसी ने इस हिस्से में डायवर्जन कर मरम्मत शुरू कर दी है।
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर यात्री सुविधाओं और सुरक्षा को लेकर किए गए दावे जमीनी हकीकत में खोखले साबित हो रहे हैं। बुधवार को अमर उजाला की टीम के रियलिटी चेक में कई इमरजेंसी फोन बूथ खराब मिले, जबकि सर्विस एंड रेस्ट एरिया भी पूरी तरह तैयार नहीं हैं। लखनऊ से कानपुर जाते समय किमी संख्या 56.1 पर लगे इमरजेंसी फोन बूथ में ग्रीन लाइट जल रही थी, लेकिन रेड लाइट गायब थी। बटन दबाने के बावजूद कंट्रोल रूम से संपर्क नहीं हो सका। किमी 58 पर बूथ से कंट्रोल रूम में संपर्क तो हुआ, लेकिन वहां तैनात कर्मी को बूथ से आवाज सुनाई नहीं दे रही थी। कई प्रयास के बाद भी बातचीत नहीं हो सकी। दो किमी बाद किमी संख्या 60 पर लगा इमरजेंसी फोन बूथ काम कर रहा था। कंट्रोल रूम कर्मी से कनेक्ट भी हुआ। लेकिन कर्मी को आवाज ही नहीं सुनाई दे रही थी। कई बार बूथ से कनेक्ट किया गया, लेकिन कर्मी से बातचीत नहीं हो पाई। वापसी में भी कई बूथ बदहाल मिले।
एनएचएआई ने दावा किया था कि इमरजेंसी फोन बूथ से 15 मिनट के भीतर मदद उपलब्ध कराई जाएगी। लखनऊ से कानपुर की ओर एक सर्विस एंड रेस्ट एरिया में छोटा रेस्टोरेंट और निर्माणाधीन भवन है। शौचालय गंदे और बदबूदार मिले। वहीं कानपुर से लखनऊ की ओर प्रस्तावित सर्विस एरिया के लिए केवल जमीन चिह्नित है। यहां मेडिकल सुविधा, विश्राम, ईंधन, खानपान और पार्किंग जैसी सुविधाएं मिलनी हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक सुविधाएं विकसित किए बिना टोल वसूली शुरू करना उचित नहीं था। फिलहाल मरम्मत कार्य के चलते टोल वसूली बंद है। हालांकि एनएचएआई की 1033 हेल्पलाइन पूरी तरह सक्रिय मिली। टीम की गाड़ी खराब होने की सूचना पर कर्मचारियों ने लगातार संपर्क किया और समस्या के समाधान तक मदद की। एंबुलेंस और पुलिस हेल्पलाइन भी काम करती मिलीं।